राउज़ एवेन्यू कोर्ट में खड़गे के भाषण पर सुनवाई, वीडियो सबूत की मांग

राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के भाषण पर सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता से वीडियो क्लिप प्रस्तुत करने को कहा है। यह मामला खड़गे के कथित हेट स्पीच से संबंधित है, जो उन्होंने अप्रैल 2023 में कर्नाटक में एक चुनावी रैली में दिया था। कोर्ट ने पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली रिविज़न याचिका पर सुनवाई की। जानें इस मामले में आगे क्या हुआ और खड़गे ने अपने बचाव में क्या कहा।
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खड़गे के भाषण पर कोर्ट की सुनवाई

राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शिकायतकर्ता से उन न्यूज़ वीडियो क्लिप के लिंक प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का भाषण शामिल है, जो अप्रैल 2023 में कर्नाटक में एक चुनावी रैली के दौरान दिया गया था। यह सुनवाई एक रिविज़न याचिका पर हो रही है, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसने खड़गे के कथित विवादास्पद भाषण के खिलाफ शिकायत को खारिज कर दिया था। रिविज़न याचिका में तीस हज़ारी कोर्ट द्वारा 11 नवंबर, 2025 को पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने शिकायतकर्ता के वकील रविंदर गुप्ता को वीडियो लिंक जमा करने का आदेश दिया और कहा कि वह स्वयं उस भाषण को देखना चाहते हैं। मामले को स्पष्टीकरण के लिए 6 अगस्त को सूचीबद्ध किया गया है।


रिविज़न याचिका पर बहस

रिविज़न याचिकाकर्ता की ओर से वकील गगन गांधी ने अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। यह मामला खड़गे द्वारा अप्रैल 2023 में कर्नाटक के नरेगल में दिए गए कथित हेट स्पीच से संबंधित है। मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पहले FIR दर्ज करने का आदेश देने से इनकार कर दिया था और बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े वकील रविंदर गुप्ता की शिकायत को खारिज कर दिया था। 2 अप्रैल को खड़गे ने रिविज़न कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया, जिसमें उन्होंने सभी आरोपों का खंडन किया और रिविज़न याचिका पर सुनवाई करने के स्पेशल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया।


खड़गे का बचाव

खड़गे ने अपने जवाब में कहा कि स्पेशल कोर्ट के पास MP और MLA से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार है, लेकिन ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) द्वारा पारित आदेशों पर रिविज़न का अधिकार नहीं है। उन्होंने समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोपों से भी इनकार किया और तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A, 153B, 295A, 499, 120B और 34 के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। उन्होंने यह भी कहा कि चुनौती दिया गया आदेश 9 दिसंबर, 2024 के आदेश की समीक्षा या वापसी नहीं है, जिसके माध्यम से JMFC ने FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।


अदालत का निर्णय

29 जनवरी, 2026 को राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने शिकायत खारिज किए जाने के खिलाफ दायर पुनरीक्षण याचिका पर खड़गे को नोटिस जारी किया। 11 नवंबर, 2025 को तीस हजारी कोर्ट ने आपराधिक शिकायत को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घृणास्पद भाषण का कोई अपराध नहीं बनता है, क्योंकि यह भाषण किसी समुदाय या धर्म के बजाय राजनीतिक और वैचारिक सिद्धांतों पर लक्षित था। इससे पहले, 9 दिसंबर, 2024 को भी अदालत ने खड़गे के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया था।