महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी हलचल: कांग्रेस ने मोदी के बयान पर उठाए सवाल
महिला आरक्षण विधेयक पर सियासी विवाद
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर गर्मी आ गई है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया लेख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे चुनावी रणनीति करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में महिलाओं का समर्थन पाने के लिए इस मुद्दे पर "यू-टर्न" लिया है।
रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'प्रधानमंत्री ने खुद को लोकसभा और विधानसभाओं में महिला आरक्षण का एकमात्र समर्थक बताने के लिए मीडिया में लेख लिखना शुरू किया है। वास्तव में, उन्हें भारत की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।'
उन्होंने यह भी कहा कि जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 को संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया था, तब कांग्रेस ने इसे 2024 से लागू करने की मांग की थी, लेकिन यह प्रधानमंत्री को स्वीकार्य नहीं था।
रमेश का कहना है कि प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना की प्रक्रिया पर निर्भर कर दिया था, जिसे वह कराने में असफल रहे और कई वर्षों तक टालते रहे।
उन्होंने यह भी दावा किया, 'अब जब निर्वाचन आयोग केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन काम कर रहा है और विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार निश्चित नजर आ रही है, तब 30 महीनों बाद प्रधानमंत्री ने अपना मन बदल लिया है। वह चाहते हैं कि हम जनगणना को भूल जाएं और जनगणना आधारित परिसीमन को इस आधार पर नजरअंदाज करें कि इसमें बहुत समय लगेगा।'
यह इस तथ्य के बावजूद है कि जनगणना पंजीयक ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के परिणाम 2027 तक सामने आएंगे। कांग्रेस नेता ने कहा, 'यह एक कहानी है जो झूठ और गोलमोल बातों पर आधारित है। यह सब इस उम्मीद से किया गया है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाएं भाजपा का समर्थन करेंगी। आखिरकार, भाजपा के पास इन राज्यों में किसी अन्य मुद्दे पर कोई सार्थक विमर्श नहीं है।'
रमेश ने यह भी कहा, 'यह मोदी सरकार का यू-टर्न है, जो विपक्ष के साथ जुड़ने की उसकी अनिच्छा और योजना की पूर्ण कमी को उजागर करता है।' उन्होंने आरोप लगाया, 'प्रधानमंत्री मोदी पहले से ही यू-टर्न का श्रेय लेने का दावा कर रहे हैं। उनके पाखंड और धोखे की कोई सीमा नहीं है। यह सब शासन में उनकी बड़ी विफलताओं और विदेश नीति में गंभीर झटकों को छुपाने के लिए है।'
प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह पूरे भारत में करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। मोदी ने सभी सांसदों से इस कदम का समर्थन करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया था।
प्रधानमंत्री ने अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित लेख में कहा था कि यह कदम उस सिद्धांत की पुष्टि है जिसने लंबे समय से भारत की सभ्यतागत विचारधारा का मार्गदर्शन किया है कि समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाएं प्रगति करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का लेख: क्या था मुख्य संदेश?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी वेबसाइट पर एक लेख में महिला आरक्षण को 'करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब' बताया। उनके लेख के प्रमुख बिंदु थे:
एकजुटता का आह्वान: प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों से इस ऐतिहासिक कदम का समर्थन करने की अपील की।
सभ्यतागत विचारधारा: उन्होंने कहा कि समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाएं प्रगति करती हैं, और यह विधेयक इसी सिद्धांत की पुष्टि है।
महज विधायी प्रक्रिया नहीं: पीएम के अनुसार, यह कानून केवल कागज पर नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सभ्यतागत सोच का हिस्सा है।
