ममता बनर्जी ने ईडी की छापेमारी पर भाजपा को किया आड़े हाथों

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में आई-पैक कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों से पहले उनकी पार्टी के दस्तावेजों को जब्त करने के लिए यह कार्रवाई कर रही है। बनर्जी ने ईडी और गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है। इस मामले का संबंध करोड़ों रुपये के कोयले की चोरी से है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं।
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ममता बनर्जी ने ईडी की छापेमारी पर भाजपा को किया आड़े हाथों

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता में आई-पैक कार्यालय पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी ने भाजपा के दस्तावेजों को जब्त किया है और भाजपा को चेतावनी दी है कि उनके राज्य कार्यालय पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है।


बनर्जी ने कहा कि भाजपा विधानसभा चुनावों से पहले उनकी पार्टी के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए छापेमारी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ईडी और गृह मंत्री अमित शाह का यह कर्तव्य है कि वे पार्टी की हार्ड डिस्क और उम्मीदवारों की सूची को जब्त करें।


उन्होंने यह भी कहा कि ये गृह मंत्री, जो देश की सुरक्षा में असफल हैं, मेरी पार्टी के सभी दस्तावेज ले जा रहे हैं। अगर मैं भाजपा के कार्यालय पर छापा मारूं तो क्या होगा? एक ओर, वे पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के नाम मिटा रहे हैं, जबकि चुनावों के कारण वे मेरी पार्टी के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं।


ईडी की कार्रवाई का संदर्भ

ईडी की कार्रवाई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा नवंबर 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी से संबंधित है, जिसमें बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के क्षेत्रों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स की खदानों से करोड़ों रुपये के कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था। इस मामले में स्थानीय कोयला व्यापारी अनूप मांझी उर्फ लाला मुख्य संदिग्ध हैं।


ईडी ने पहले तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी से भी पूछताछ की थी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। ईडी का दावा है कि वह अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त धन के लाभार्थी हैं।


आई-पैक का इतिहास

आई-पैक की स्थापना वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने की थी। बाद में उन्होंने जन सुराज नामक एक राजनीतिक दल बनाया, जिसे पिछले साल बिहार विधानसभा चुनावों में कोई सीट नहीं मिली। यह परामर्श फर्म 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम कर चुकी है।


तृणमूल और पश्चिम बंगाल सरकार के लिए 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कार्यों का विवरण आई-पैक की वेबसाइट पर साझा किया गया है, जिसका शीर्षक है दीदी-आर 10 ओंगीकर।