ममता बनर्जी के लिए संकट: टीएमसी में विद्रोह और इस्तीफों की लहर

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में हाल ही में विद्रोह की स्थिति उत्पन्न हुई है, जब राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए भाजपा के पक्ष में जनादेश की बात की। इसके बाद, 11 अन्य सांसदों ने उनसे मुलाकात की, जिससे भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। टीएमसी के 20 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आंतरिक मतभेदों की स्थिति को उजागर किया है, जिससे पार्टी में नई राजनीतिक हलचल की संभावना बढ़ गई है।
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टीएमसी में विद्रोह की स्थिति

सोमवार को ममता बनर्जी ने इंडिया ब्लॉक की बैठक में भाग लिया, लेकिन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राज्यसभा सांसद सुखेन्दु शेखर रॉय के अचानक पार्टी छोड़ने और इस्तीफे के बाद उनकी चुनौतियाँ बढ़ गई हैं। रॉय ने अपने इस्तीफे में पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि 2026 के पश्चिम बंगाल चुनावों में जनता का समर्थन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में है। इसके तुरंत बाद, 11 अन्य सांसदों ने दिल्ली में रॉय से मुलाकात की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से भी बातचीत की, जिससे भाजपा में शामिल होने की अटकलें बढ़ गईं। उल्लेखनीय है कि टीएमसी के लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 13 सदस्य हैं।


पार्टी में विद्रोह का विस्तार

यह विद्रोह संसद में 2026 के राज्य चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुए विद्रोह के संदर्भ में है, जहां पार्टी के पास 80 सीटें थीं। विधानसभा में 57 विधायकों ने निष्कासित ऋतब्रता बनर्जी का समर्थन किया है, जिन्हें सदन में विपक्ष का नेता (एलओपी) नामित किया गया है। यह ध्यान देने योग्य है कि संसद और विधानसभा दोनों में बागी नेताओं ने ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ असहमति जताई है। उन्होंने पार्टी के कार्यों से निराशा व्यक्त की है और राज्य में पार्टी के पतन के लिए अभिषेक को जिम्मेदार ठहराया है।


टीएमसी के सांसदों का पत्र

सूत्रों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस के 20 से अधिक सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेदों की अटकलों को और बढ़ा दिया है। खबरों के अनुसार, ये सांसद एक अलग समूह या एक नया राजनीतिक गुट बनाने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि उनके पास पर्याप्त संख्या में सांसद हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि लोकसभा में टीएमसी का एक अलग गुट जल्द ही बन सकता है, हालांकि अंतिम निर्णय उचित समय पर लिया जाएगा।