भारत की कूटनीति: वैश्विक मंच पर एक नई पहचान
भारत की कूटनीति का नया अध्याय
अंतरराष्ट्रीय राजनीति इस समय एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रही है, और इस संदर्भ में भारत की कूटनीति आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। नई दिल्ली अब केवल प्रतिक्रियाओं की राजधानी नहीं रह गई है, बल्कि यह वैश्विक घटनाओं को प्रभावित करने वाली एक प्रमुख शक्ति बनती जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सक्रिय कूटनीति भारत की विदेश नीति को नई दिशा दे रही है।
मोदी और नेतन्याहू के बीच बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर विस्तृत चर्चा की। यह बातचीत केवल औपचारिकता नहीं थी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने का संकेत थी। वर्तमान में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है, जहां गाजा में इजराइल की सैन्य कार्रवाई जारी है। ऐसे में मोदी और नेतन्याहू की बातचीत भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाती है।
भारत और अमेरिका के रिश्ते
यह वार्ता उस समय हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर मतभेद उभर रहे हैं। फिर भी, भारत ने यह साबित किया है कि वह किसी एक शक्ति पर निर्भर नहीं है। इजराइल के साथ मजबूत संवाद यह दर्शाता है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को प्राथमिकता देता है। रक्षा तकनीक, खुफिया सहयोग और आतंकवाद विरोधी रणनीति में भारत और इजराइल की नजदीकी लंबे समय से जानी जाती है।
जर्मन चांसलर की प्रस्तावित यात्रा
भारत की कूटनीतिक गतिविधियां केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं हैं। अगले सप्ताह जर्मन चांसलर की भारत यात्रा प्रस्तावित है, जो भारत और यूरोप के रिश्तों को और मजबूत करेगी। जर्मनी को यूरोप की आर्थिक और राजनीतिक धुरी माना जाता है, और उसके शीर्ष नेतृत्व का भारत आना यह दर्शाता है कि नई दिल्ली वैश्विक शक्ति संतुलन में एक अनिवार्य साझेदार बन चुकी है।
विदेश मंत्री की महत्वपूर्ण यात्रा
विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय फ्रांस और लक्जमबर्ग की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं। यह दौरा भारत की बहुस्तरीय कूटनीति का एक मजबूत उदाहरण है। फ्रांस भारत का पुराना रणनीतिक साझेदार है, और लक्जमबर्ग जैसे छोटे लेकिन प्रभावशाली देश के साथ संपर्क यह दिखाता है कि भारत हर मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
भारत की विदेश नीति का नया दृष्टिकोण
इन सभी पहलुओं को देखते हुए यह स्पष्ट होता है कि भारत की विदेश नीति अब प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित और आक्रामक हो चुकी है। मोदी की कूटनीति का मूल मंत्र यह है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। इजराइल से संवाद हो या यूरोप के साथ साझेदारी, भारत हर मोर्चे पर अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट और निर्भीक तरीके से रख रहा है।
भारत की कूटनीति की सफलता
मोदी सरकार की यह सफलता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया इस समय ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है। ऐसे में संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता। फिर भी, भारत ने यह दिखाया है कि वह अमेरिका, यूरोप, पश्चिम एशिया और ग्लोबल साउथ के साथ संवाद रखते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान कायम रख सकता है।
भारत की नई पहचान
आज भारत की कूटनीति केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है। फोन पर हुई बातचीत, यात्राओं की श्रृंखला और निरंतर संवाद यह साबित करते हैं कि भारत वैश्विक मंच पर एक निर्णायक और भरोसेमंद शक्ति के रूप में स्थापित हो रहा है। मोदी की सक्रियता और स्पष्ट दृष्टि ने भारत की विदेश नीति को मजबूती और नई दिशा दी है।
