प्रियंका गांधी ने असम के मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की निंदा की

कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने इस भाषा को शर्मनाक और अस्वीकार्य बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या वे इस अपमान का समर्थन करते हैं। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें उन्होंने सरमा की टिप्पणियों को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय का अपमान बताया। यह विवाद राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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प्रियंका गांधी ने असम के मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की निंदा की

कांग्रेस नेता की कड़ी प्रतिक्रिया

कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ की गई टिप्पणियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की भाषा बेहद शर्मनाक और अस्वीकार्य है। प्रियंका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया कि क्या वे इस अपमान का समर्थन करते हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सरमा ने खरगे की उस टिप्पणी का जवाब दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि बुढ़ापे के कारण वे "पागल की तरह बोल रहे हैं"।


खरगे का अपमान और उसकी गंभीरता

गांधी ने एक हिंदी पोस्ट में कहा कि असम के मुख्यमंत्री द्वारा राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ की गई अपमानजनक भाषा बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि खरगे देश के प्रमुख नेताओं में से एक हैं और न केवल कांग्रेस बल्कि दलितों और हाशिए पर पड़े समुदायों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा के मुख्यमंत्री द्वारा उनका अपमान करना करोड़ों लोगों का अपमान है।


प्रधानमंत्री से स्पष्टता की मांग

प्रियंका ने प्रधानमंत्री मोदी से स्पष्टता की मांग की कि क्या वे करोड़ों भारतीयों के इस अपमान का समर्थन करते हैं। इससे पहले, कांग्रेस ने सरमा से बिना शर्त माफी मांगने की अपील की थी और उनकी टिप्पणियों को "निंदनीय" और "दलित विरोधी मानसिकता" का प्रतीक बताया था।


राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी असम के मुख्यमंत्री की टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने इसे पूरी तरह से निंदनीय और अस्वीकार्य बताया। राहुल ने कहा कि ये टिप्पणियां अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय का अपमान हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री दलितों की गरिमा पर हमले होते हुए देखते हैं और चुप रहते हैं, तो वे न केवल अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं, बल्कि इस अपमान में भागीदार भी हैं।