तृणमूल कांग्रेस में बगावत: सांसदों के एनडीए में शामिल होने की कोशिश पर विवाद

तृणमूल कांग्रेस में बगावत की स्थिति उत्पन्न हो गई है, जब सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने एनडीए में शामिल होने की कोशिश का दावा किया। महुआ मोइत्रा ने इन सांसदों को गद्दार करार दिया। सौगत रॉय ने भाजपा के प्रस्ताव को ठुकराते हुए अपनी पार्टी के प्रति वफादारी दिखाई। इस बीच, टीएमसी को दलबदल के दबाव का सामना करना पड़ रहा है। जानें इस राजनीतिक उथल-पुथल के पीछे की पूरी कहानी।
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तृणमूल कांग्रेस में बगावत का मामला

तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने हाल ही में यह दावा किया कि उन्होंने लगभग 20 सांसदों के साथ मिलकर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की कोशिश की है। इस पर महुआ मोइत्रा ने इन सांसदों को स्वार्थी और गद्दार करार दिया। दस्तीदार ने सोमवार को कहा कि पार्टी के करीब 20 सांसदों ने एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताई है और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक पत्र भी सौंपा है। उनका यह बयान हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के परिणामों के संदर्भ में आया है।


महुआ मोइत्रा का बयान

मोइत्रा ने कहा कि सांसदों ने 2024 में टीएमसी के टिकट पर जीत हासिल की थी और एनडीए को जनादेश नहीं मिला था। उन्होंने कहा कि जो सांसद भाजपा में शामिल होना चाहते हैं, उन्हें अपनी सीटें छोड़कर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह देखना दिलचस्प होगा कि वे कितने बड़े नेता साबित होते हैं।


सौगत रॉय का रुख

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने सोमवार को भाजपा द्वारा दिए गए दल-बदल के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह उसी पार्टी में रहेंगे जिसके चुनाव चिन्ह पर उन्होंने चुनाव जीता था। रॉय ने कहा कि उन्हें भाजपा से जुड़ने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया।


टीएमसी की स्थिति

रॉय की यह टिप्पणी उस समय आई जब टीएमसी का नेतृत्व दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के सहयोगियों के साथ बैठक कर रहा था। पार्टी को हाल ही में एक राज्यसभा सांसद के इस्तीफे और कुछ लोकसभा सदस्यों द्वारा भाजपा के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से मुलाकात के कारण दवाब का सामना करना पड़ रहा है। रॉय ने कहा कि टीएमसी को लगातार निशाना बनाया जा रहा है और सहयोगियों का समर्थन इसे मजबूत करेगा।


कांग्रेस का समर्थन

रॉय ने सोनारपुर में टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद कांग्रेस की प्रतिक्रिया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब अभिषेक पर हमला हुआ, तो कांग्रेस के नेताओं ने इसकी निंदा की। यह टीएमसी में विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद मची उथल-पुथल के विपरीत था। भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से 208 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के लंबे कार्यकाल को समाप्त किया।


सौगत रॉय का बयान

जब सौगत रॉय से टीएमसी में फूट पड़ने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि यह विद्रोह उन लोगों का है जो राजनीति में तो हैं, लेकिन मानसिक रूप से मजबूत नहीं हैं। उन्होंने विधानसभा चुनाव में मिली हार का जिक्र करते हुए कहा कि हालात बिगड़ने पर वे अपना रवैया बदल लेते हैं।