तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल: काकोली घोष दस्तीदार की भाजपा बैठक में उपस्थिति

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में चल रही उथल-पुथल के बीच, सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने भाजपा की प्रशासनिक बैठक में भाग लिया। इस बैठक में अन्य विधायकों की उपस्थिति ने राजनीतिक समीकरणों में बदलाव का संकेत दिया है। दस्तीदार ने अपनी निष्ठा और पार्टी के भीतर असंतोष को लेकर सोशल मीडिया पर भी अपनी भावनाएं व्यक्त की थीं। मुख्यमंत्री ने इस बैठक को पुरानी राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत बताया। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी।
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तृणमूल कांग्रेस में उथल-पुथल: काकोली घोष दस्तीदार की भाजपा बैठक में उपस्थिति gyanhigyan

तृणमूल कांग्रेस में राजनीतिक हलचल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में चल रही उथल-पुथल के बीच, पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की प्रशासनिक समीक्षा बैठक में भाग लिया। दस्तीदार, जिन्होंने हाल ही में संगठनात्मक पद से इस्तीफा दिया था, भाजपा सरकार के मंच पर नजर आईं, जब राज्य के राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।


बैठक में बारासात सांसद के अलावा, देगंगा के विधायक अनीसुर रहमान बिश्वास, स्वरूपनगर की बीना मंडल, हरोआ के मोहम्मद अब्दुल मतीन और बशीरहाट क्षेत्र के अन्य विधायक भी शामिल हुए। यह बैठक एपीजे अब्दुल कलाम सभागार में आयोजित की गई, जिसमें उत्तर 24 परगना, नादिया और हुगली जिलों के अधिकारी और निर्वाचित जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।


हालांकि, दस्तीदार की उपस्थिति का महत्व बैठक के प्रशासनिक उद्देश्य से कहीं अधिक है। उन्होंने हाल ही में तृणमूल के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया था। इससे पहले, उन्हें संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाया गया था, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी निष्ठा का जिक्र किया।


दस्तीदार ने अटकलों को दरकिनार करते हुए कहा, 'प्रशासन सभी का है।' बैठक में शामिल तृणमूल विधायकों ने भी विकास संबंधी मुद्दों पर चर्चा करने की बात कही। बीना मंडल ने कहा, 'मैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए आई हूं।' अब्दुल मतीन ने भी कहा कि राज्य सरकार ने उन्हें आमंत्रित किया था।


अनीसुर रहमान बिश्वास ने कहा कि उनके क्षेत्र में कई पिछड़े इलाके हैं और विकास के लिए सरकार का सहयोग आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने इस बैठक को पश्चिम बंगाल की पुरानी राजनीतिक संस्कृति में बदलाव का संकेत बताया। उन्होंने कहा, 'जब हम विपक्ष में थे, हमें प्रशासनिक बैठकों में आमंत्रित नहीं किया जाता था। अब हमने विधायकों को आमंत्रित करने का निर्णय लिया है।'


दस्तीदार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और बसीरहाट के कई विपक्षी विधायकों की भागीदारी का स्वागत किया। तृणमूल विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने भी इस प्रक्रिया को स्वस्थ लोकतांत्रिक प्रक्रिया बताया और कहा कि पिछले 15 वर्षों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।