तमिलनाडु में 'सनातन धर्म' पर राजनीतिक विवाद फिर से गरमाया

तमिलनाडु की राजनीति में 'सनातन धर्म' का विवाद एक बार फिर से गरमाया है। डीएमके के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में अपने भाषण में 'सनातन विरोधी' रुख को दोहराया और इसे समाप्त करने की मांग की। उनके विवादास्पद बयान ने देशभर में राजनीतिक हलचल मचाई है, जिसके परिणामस्वरूप कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई हैं। जानें इस मुद्दे की पूरी कहानी और इसके राजनीतिक प्रभावों के बारे में।
 | 
तमिलनाडु में 'सनातन धर्म' पर राजनीतिक विवाद फिर से गरमाया gyanhigyan

तमिलनाडु विधानसभा में 'सनातन धर्म' का मुद्दा

तमिलनाडु की राजनीति में 'सनातन धर्म' का विवाद एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गया है। मंगलवार को विधानसभा सत्र के दौरान, विपक्षी दल डीएमके के विधायक उदयनिधि स्टालिन ने अपने भाषण में 'सनातन विरोधी' रुख को दोहराया। उन्होंने सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि समाज में भेदभाव पैदा करने वाली व्यवस्थाओं को समाप्त किया जाना चाहिए।


उदयनिधि स्टालिन का संबोधन

उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में अपने संबोधन में 'सनातन विरोधी' मुद्दे को फिर से उठाया और इसे समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा, "सनातन, जिसने समाज में विभाजन पैदा किया है, उसे समाप्त कर देना चाहिए।"


उन्होंने आगे कहा, "मुख्यमंत्री को हमारे नेताओं से शुभकामनाएं मिलीं। यह राजनीतिक शिष्टाचार इस सदन में भी बनाए रखना चाहिए। हमें तमिलनाडु के विकास के लिए एक साथ काम करना चाहिए।"


राजनीतिक शिष्टाचार और वैचारिक मतभेद

उदयनिधि स्टालिन का यह भाषण दर्शाता है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति वैचारिक और भाषाई मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री को सहयोग का प्रस्ताव दिया, जबकि 'सनातन' और 'तमिल पहचान' जैसे मुद्दों पर अपने सख्त रुख को बनाए रखा।


विवाद की शुरुआत

यह विवाद 2 सितंबर, 2023 को शुरू हुआ, जब उदयनिधि स्टालिन ने चेन्नई में 'सनातन उन्मूलन सम्मेलन' में एक विवादास्पद भाषण दिया।


उन्होंने सनातन धर्म की तुलना 'डेंगू, मलेरिया और कोरोना' जैसी बीमारियों से की और कहा कि "ऐसी चीजों का केवल विरोध नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें पूरी तरह से समाप्त कर देना चाहिए।"


राजनीतिक परिणाम

उनके इस बयान के बाद देशभर में राजनीतिक हलचल मच गई और कई राज्यों में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।


मद्रास हाई कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उदयनिधि का बयान 'हेट स्पीच' की श्रेणी में आता है।


DMK की विचारधारा

DMK की राजनीति ऐतिहासिक रूप से पेरियार के 'आत्म-सम्मान आंदोलन' पर आधारित है, जो ब्राह्मणवाद और सनातनी परंपराओं का विरोध करती रही है। उदयनिधि का बार-बार इस मुद्दे को उठाना उनके कट्टर द्रविड़ समर्थक वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश मानी जाती है।