गौरव गोगोई का आरोप: मुख्यमंत्री सरमा ने एआईयूडीएफ का समर्थन मांगा
मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने राज्यसभा के लिए एआईयूडीएफ का समर्थन मांगने की कोशिश की है। गोगोई का कहना है कि यह भाजपा की सत्ता-केन्द्रित राजनीति को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरमा, जो पहले एआईयूडीएफ को सांप्रदायिक पार्टी मानते थे, अब अपनी राजनीतिक स्थिति को बनाए रखने के लिए उनका समर्थन मांगने को मजबूर हो गए हैं।
एआईयूडीएफ के विधायकों का समर्थन
गोगोई ने यह भी बताया कि एआईयूडीएफ के तीन विधायकों, करीमुद्दीन बरभुइया, निजामुद्दीन चौधरी और जाकिर हुसैन लस्कर ने एनडीए के राज्यसभा उम्मीदवार प्रमोद बोरो के नामांकन पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही, उन्होंने मुख्यमंत्री की आलोचना करते हुए कहा कि सरमा ने असम की जनता को एआईयूडीएफ से डराने का काम किया है और अपने भाषणों में विभाजनकारी शब्दों का इस्तेमाल किया है।
राजनीतिक विभाजन का आरोप
गोगोई ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने आक्रामक बेदखली अभियानों और बुलडोजर राजनीति को बढ़ावा देकर समाज में विभाजन को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि जब भाजपा को तीसरी राज्यसभा सीट के लिए बहुमत की कमी का सामना करना पड़ा, तब एआईयूडीएफ, जिसे पहले सांप्रदायिक माना जाता था, अचानक सत्ताधारी दल के लिए स्वीकार्य हो गया।
राजनीतिक विरोधाभास पर सवाल
गौरव गोगोई ने यह सवाल उठाया कि यदि एआईयूडीएफ वास्तव में असम के लिए खतरा है, तो भाजपा को प्रमोद बोरो की जीत सुनिश्चित करने के लिए उनके समर्थन की आवश्यकता क्यों पड़ी? उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और एआईयूडीएफ के बीच गुप्त संबंध हैं, और दोनों पार्टियों के बीच होने वाले अपशब्दों का आदान-प्रदान जनता को गुमराह करने के लिए एक राजनीतिक रणनीति है।
