कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर ईरान पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी की सरकार पर ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के खिलाफ चुप रहने का आरोप लगाया। उन्होंने इसे नैतिक कायरता और भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ राजनीतिक विश्वासघात बताया। रमेश ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने इन हमलों की निंदा की है या क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोई कदम उठाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने ईरान में हो रही लक्षित हत्याओं और सत्ता परिवर्तन के प्रयासों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मोदी सरकार पर ईरान पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया

कांग्रेस नेता की आलोचना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने शनिवार को केंद्र सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद चुप रहने का आरोप लगाया। रमेश ने इसे नैतिक कायरता और भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ राजनीतिक विश्वासघात करार दिया। उन्होंने X पर एक पोस्ट में सरकार के इस रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान पर हवाई हमले को तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है।


सरकार की चुप्पी पर सवाल

रमेश ने यह भी कहा कि केंद्र ने न तो इन हमलों की निंदा की है और न ही क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कोई राजनयिक कदम उठाए हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमले को 21 दिन हो चुके हैं और प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा से लौटने के बाद भी 23 दिन बीत चुके हैं। क्या मोदी सरकार ने इस गंभीर हवाई हमले की निंदा की है? जवाब है नहीं।


अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों पर चुप्पी

उन्होंने आगे सवाल किया कि क्या मोदी सरकार ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के शीर्ष नेताओं की लक्षित हत्याओं की निंदा की है, जो लगातार जारी हैं? क्या मोदी सरकार ने ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए किए जा रहे प्रयासों की आलोचना की है, जिससे गृहयुद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है? जवाब फिर से नहीं है।


राजनयिक प्रयासों की कमी

रमेश ने यह भी पूछा कि क्या मोदी सरकार ने ईरान पर बमबारी और खाड़ी देशों में ऊर्जा और अन्य बुनियादी ढांचे पर हमलों को रोकने के लिए गंभीर राजनयिक प्रयास किए हैं? क्या प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति और इजराइली प्रधानमंत्री के साथ अपनी मित्रता का उपयोग युद्धविराम के लिए किया है? जवाब फिर से नहीं है। उन्होंने कहा कि ये सभी 'नहीं' भारत के सांस्कृतिक मूल्यों की नैतिक कायरता और राजनीतिक विश्वासघात को दर्शाते हैं।