कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ग्रेट निकोबार परियोजना पर मोदी सरकार पर उठाए सवाल
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने बुधवार को केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना के आलोचकों को चीन के प्रति नरम बताने के लिए एक प्रचार अभियान चला रही है। उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार चीन के सामने आत्मसमर्पण की नीति अपना रही है। रमेश ने एक पोस्ट में उल्लेख किया कि सरकार इस परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और मानवाधिकार मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।
सरकार की नीति पर सवाल
रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने ही माध्यम से एक प्रचार अभियान शुरू किया है, जिसमें ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना से प्रभावित लोगों को 'चीन के प्रति नरम' करार दिया जा रहा है। यह एक बड़ा पाखंड है, खासकर तब जब सरकार खुद चीन के सामने आत्मसमर्पण की नीति का पालन कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने चीन के साथ संबंधों में भारत की स्थिति को कमजोर किया है।
गलवान संघर्ष का संदर्भ
रमेश ने गलवान संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि 19 जून, 2020 को प्रधानमंत्री ने चीन को एक अस्पष्ट क्लीन चिट दी, जो लद्दाख में शहीद हुए 20 जवानों का अपमान था। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने चीन के साथ बातचीत के दौरान लद्दाख के कई क्षेत्रों में पारंपरिक गश्त और पशुपालन के अधिकार छोड़ दिए हैं। इसके अलावा, उन्होंने व्यापार असंतुलन की भी आलोचना की।
चीन के साथ व्यापार घाटा
रमेश ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारत का चीन के साथ 2025-26 में लगभग 115 अरब अमेरिकी डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार घाटा हुआ, जिससे भारतीय उद्योग, विशेषकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भारी नुकसान हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर पर ध्यान
उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन की कथित भूमिका के बारे में वरिष्ठ सेना अधिकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों पर ध्यान नहीं दे रही है। रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।
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