कांग्रेस ने राम मंदिर दान चोरी पर मोदी की चुप्पी पर उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव का बयान
देहरादून में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे और दान की कथित चोरी के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने की मांग की। यह बयान उन्होंने उत्तराखंड के दो दिवसीय दौरे के अंतिम दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया।
भाजपा और अन्य संगठनों पर आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) पिछले कई वर्षों से राम मंदिर के नाम पर चंदा इकट्ठा कर रहे हैं, और उस धन को ट्रस्ट प्राधिकरण ने चुरा लिया है। उन्होंने यह भी पूछा कि इस चंदा चोरी के लिए कौन जिम्मेदार है। वेणुगोपाल ने कहा कि चूंकि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री मोदी की देखरेख में हुआ था, इसलिए उन्हें इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए।
संसद में उठाएंगे मुद्दा
वेणुगोपाल ने यह भी बताया कि कांग्रेस पार्टी इस कथित चोरी के मुद्दे को संसद में बड़े पैमाने पर उठाने की योजना बना रही है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस महासचिव के साथ उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी मौजूद थे।
चुनाव तैयारियों की समीक्षा
उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए, वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने अपने दौरे के दौरान पार्टी की चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा की। उन्होंने वरिष्ठ नेताओं, राजनीतिक मामलों की समिति, जिला कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों, विभिन्न विभागों, फ्रंटल संगठनों और वर्तमान व पूर्व विधायकों के साथ बैठकें कीं।
भाजपा सरकार पर जनता की निराशा
वेणुगोपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में पार्टी संगठन और सभी नेता एकजुट होकर चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों की भाजपा सरकार से जनता में भारी निराशा है और लोग वर्तमान सरकार के खिलाफ हैं। कांग्रेस इस स्थिति का लाभ उठाकर चुनाव जीतने का प्रयास करेगी।
बेरोजगारी और पलायन के मुद्दे
उन्होंने राज्य में बेरोजगारी और पलायन को सबसे बड़ा मुद्दा बताया और आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने इस दिशा में कुछ नहीं किया। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस युवाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी। इसके साथ ही, राज्य में चुनाव घोषणापत्र तैयार करने के लिए एक 'मैनीफेस्टो कमेटी' का गठन किया जाएगा, जो युवाओं, छात्रों, किसानों और महिलाओं के पास जाकर उनकी समस्याएं समझेगी और एक जनपक्षीय घोषणापत्र तैयार करेगी।
