कांग्रेस ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के सरकार के कदम की आलोचना की

कांग्रेस ने हाल ही में यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने के सरकार के कदम की कड़ी आलोचना की है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में उठाया गया है। रमेश ने कहा कि इस संशोधन से आम उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ पड़ेगा और यूपीआई के उपयोग पर शुल्क लग सकता है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की क्षमता पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार पहले भी अमेरिकी दबाव के आगे झुक चुकी है।
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कांग्रेस का सरकार पर हमला

नई दिल्ली, 6 अगस्त: कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा से पारित होने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर रहे हैं, जिससे डिजिटल भुगतान क्षेत्र अमेरिकी कंपनियों के लिए खुल जाएगा।


रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि यह विधेयक उस वैधानिक व्यवस्था को समाप्त कर देता है, जिसके कारण यूपीआई लेनदेन अब तक शुल्क-मुक्त रहे हैं। उनका कहना था कि इस संशोधन से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा, जो भविष्य में सभी प्रकार के डिजिटल भुगतान पर लागू किया जा सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिन्हें यूपीआई के उपयोग के लिए शुल्क चुकाना पड़ सकता है।


उन्होंने सरकार के इस तर्क को भी खारिज किया कि यूपीआई व्यवस्था को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह कदम आवश्यक है। रमेश ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के पास बिना व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त शुल्क लगाए इस व्यवस्था को टिकाऊ बनाए रखने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को 2.86 लाख करोड़ रुपये का अधिशेष हस्तांतरित किया था, जो यूपीआई जैसी महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचना को समर्थन देने के लिए पर्याप्त होता।


कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि इस संशोधन के पीछे अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की 2026 की रिपोर्ट हो सकती है, जिसमें यूपीआई और रुपे के शुल्क-मुक्त होने की आलोचना की गई थी। रमेश ने सवाल किया कि क्या मोदी सरकार अपने मित्र ट्रंप के दबाव में यूपीआई को कमजोर कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने कई बार दावा किया है कि उन्होंने भारत पर युद्धविराम के लिए दबाव बनाया था।


रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पहले भी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के मामले में अमेरिकी दबाव के आगे झुक चुकी है, जिससे किसानों और छोटे कारोबारियों के हित प्रभावित हुए हैं।