कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनावों के लिए 23 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की

कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनावों के लिए 23 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की है, जिसमें प्रमुख नेताओं के नाम शामिल हैं। पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगियों के लिए 15 सीटें छोड़ी हैं। इस चुनावी रणनीति के तहत, कांग्रेस ने बीजेपी विरोधी मतों को एकजुट करने के लिए महागठबंधन को प्राथमिकता दी है। जानें और क्या है कांग्रेस की योजना और कौन से दिग्गज नेता चुनावी मैदान में हैं।
 | 
कांग्रेस ने असम विधानसभा चुनावों के लिए 23 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की

कांग्रेस की नई उम्मीदवार सूची

कांग्रेस ने शनिवार, 14 मार्च को असम में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए 23 उम्मीदवारों की दूसरी सूची का ऐलान किया। पार्टी ने अपने गठबंधन सहयोगियों के लिए 15 सीटें छोड़ दी हैं, जबकि चुनाव अप्रैल में आयोजित होंगे। इस नई घोषणा के साथ, कांग्रेस ने अब तक 126-सदस्यीय असम विधानसभा के लिए 65 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। कांग्रेस के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल द्वारा जारी सूची में नूरुल इस्लाम श्रीजंग्राम, अब्दुल खालेक मांडिया, रकीबुद्दीन अहमद चमारिया, डेविड फुकन तिनसुकिया और बिपुल गोगोई तिनखोंग से चुनाव लड़ेंगे।


पहली सूची में प्रमुख नाम

कांग्रेस ने 3 मार्च को असम विधानसभा चुनावों के लिए 42 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी, जिसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से उम्मीदवार बनाया गया था। चुनावों की घोषणा से पहले अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर पार्टी ने बढ़त बनाने की कोशिश की है। असम में कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया नाज़िरा सीट से चुनाव लड़ेंगे, जबकि पूर्व PCC अध्यक्ष रिपुन बोरा को बरछल्ला सीट से मैदान में उतारा गया है।


दिग्गजों की चुनावी चुनौती

दिग्गजों की साख दांव पर

कांग्रेस ने चुनावों की औपचारिक घोषणा से पहले ही टिकट वितरण में बढ़त बनाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। पार्टी के कई बड़े चेहरे चुनावी मैदान में उतर चुके हैं:
गौरव गोगोई (प्रदेश अध्यक्ष): जोरहाट सीट से ताल ठोक रहे हैं।
देबब्रत सैकिया (CLP नेता): अपनी परंपरागत नाज़िरा सीट से चुनाव लड़ेंगे।
रिपुन बोरा (पूर्व PCC अध्यक्ष): बरछल्ला सीट से मैदान में उतारे गए हैं।


गठबंधन की रणनीति

रणनीतिक विश्लेषण: गठबंधन को मजबूती

असम में बीजेपी विरोधी मतों के बिखराव को रोकने के लिए कांग्रेस ने 'महागठबंधन' मॉडल को प्राथमिकता दी है। 15 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़कर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय दलों को उचित सम्मान देने के पक्ष में है। अप्रैल में होने वाले इन चुनावों में यह गठबंधन सत्ता विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश करेगा।


सोशल मीडिया पर कांग्रेस का ऐलान