एनसीपी के शशिकांत शिंदे ने 'ऑपरेशन तुतारी' पर उठाए सवाल
एनसीपी के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने 'ऑपरेशन तुतारी' को लेकर चल रही चर्चाओं को निराधार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य स्तर पर विपक्ष के विधायकों को विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिल रहा है। शिंदे ने कहा कि यह एक नई राजनीतिक मिसाल है, जिसमें विपक्ष के प्रतिनिधियों को फंड नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सत्ता बदलती है, तो मौजूदा शासकों को भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
| Jul 3, 2026, 13:58 IST
शशिकांत शिंदे का बयान
एनसीपी के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने 'ऑपरेशन तुतारी' के बारे में चल रही चर्चाओं को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक विशेष माहौल बनाने की कोशिश है। शिंदे ने स्पष्ट किया कि कोई 'ऑपरेशन तुतारी' नहीं हो रहा है और यह सिर्फ चर्चा में बने रहने का प्रयास है। उनके अनुसार, पार्टी के सभी सांसद और विधायक शरद पवार के नेतृत्व में एकजुट हैं और कोई भी सदस्य पार्टी छोड़ने का इरादा नहीं रखता। उद्धव ठाकरे के सांसदों के पाला बदलने के बाद 'ऑपरेशन तुतारी' की चर्चा शुरू हुई। यह अटकलें तब बढ़ीं जब शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा थी कि एनसीपी के कुछ सांसद एनडीए में शामिल हो सकते हैं, लेकिन शशिकांत शिंदे ने इन सभी अटकलों को खारिज कर दिया।
विपक्ष को फंड न मिलने का आरोप
शशिकांत शिंदे ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर विपक्ष के विधायकों और सांसदों को विकास कार्यों के लिए फंड नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि पहले विपक्षी दलों के चुने हुए प्रतिनिधियों को फंड देने की परंपरा थी, क्योंकि वे भी जनता द्वारा चुने गए थे। लेकिन वर्तमान में, भारतीय जनता पार्टी और सत्ताधारी पक्ष विपक्ष को दबाने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग कर रहे हैं। शिंदे ने कहा कि यह एक नई राजनीतिक मिसाल है, जिसमें विपक्ष के प्रतिनिधियों को फंड नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सत्ता बदलती है, तो मौजूदा शासकों को भी इसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
राजनीतिक स्थिति पर चिंता
शिंदे ने कहा कि वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए यह सवाल उठता है कि क्या भविष्य में लोकतंत्र बचेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ता में आने के बाद विपक्षी दलों के चुने हुए प्रतिनिधियों को तोड़ने की कोशिशें की जा रही हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।
