उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के दर्जे की बहाली पर केंद्र सरकार को घेरा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी दादी की पुण्यतिथि पर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। उन्होंने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करते हुए केंद्र से सवाल किया कि उपयुक्त समय कब आएगा। इसके साथ ही, उन्होंने स्थानीय चुनावों की आवश्यकता और केंद्र की नीतियों पर भी अपनी राय रखी। जानें उनके विचार और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं।
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मुख्यमंत्री का केंद्र पर हमला

श्रीनगर में अपनी दादी अकबर जहां की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने में उनके धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए। हजरतबल में अपने दादा-दादी की मजार पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, उमर ने केंद्र से पूछा कि उपयुक्त समय कब आएगा और स्थिति कब स्पष्ट होगी।


केंद्र की नीतियों पर सवाल

उमर अब्दुल्ला ने केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि केंद्र लद्दाख के लोगों से बातचीत करने के लिए तैयार है, तो जम्मू-कश्मीर के लोगों से बातचीत में क्या समस्या है। अपनी दादी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि धैर्य का मतलब चुप रहना नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका धैर्य उनकी ताकत है और यही सफलता का मार्ग बनेगा।


विरोध प्रदर्शन की आवश्यकता

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से आत्ममंथन करने का आग्रह किया कि डेढ़ साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस को जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को विरोध प्रदर्शन करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उमर ने कहा कि उन्होंने हमेशा बातचीत का रास्ता चुना, भले ही यह उनके राजनीतिक करियर के लिए जोखिम भरा हो सकता था।


फारूक अब्दुल्ला का बयान

इस दौरान, नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने 24 जून 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक का जिक्र किया, जिसमें प्रधानमंत्री ने दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के बीच विश्वास की कमी को दूर करने की बात कही थी। फारूक ने सवाल उठाया कि क्या वास्तव में वह दूरी कम हो सकी है।


राज्य की शासन-व्यवस्था पर आरोप

फारूक अब्दुल्ला ने भाजपा नीत केंद्र सरकार पर उपराज्यपाल के माध्यम से राज्य की शासन-व्यवस्था को नियंत्रित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि राजभवन के माध्यम से लोगों को परेशान करना था, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे क्यों बढ़ाया गया। उमर ने भी इस बात का समर्थन किया कि केंद्र को पहले ही स्पष्ट कर देना चाहिए था कि वे सरकार के हाथ बांधकर काम कराएंगे।


स्थानीय चुनावों पर प्रतिक्रिया

अंत में, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्थानीय चुनाव कराने की केंद्र की मंशा पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वे स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव चाहते हैं, लेकिन इन चुनावों का उपयुक्त समय जम्मू-कश्मीर की चुनी हुई सरकार ही तय करेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने उनकी शालीनता और चुप्पी का मजाक बना दिया है।