असम टीएमसी अध्यक्ष ने इस्तीफा देकर पार्टी की दिशा पर उठाए सवाल

अभिजीत मजूमदार ने असम तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर पार्टी की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी अब एक सांप्रदायिक संगठन बन गई है, जो मुस्लिम वोट बैंक को प्राथमिकता दे रही है। मजूमदार ने पार्टी के आदर्शों को धोखा देने का भी आरोप लगाया और कहा कि अब पार्टी छोड़ने का सही समय है। उनका इस्तीफा टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद आया है। जानें इस राजनीतिक हलचल के पीछे की कहानी।
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असम टीएमसी अध्यक्ष ने इस्तीफा देकर पार्टी की दिशा पर उठाए सवाल gyanhigyan

अभिजीत मजूमदार का इस्तीफा

असम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले अभिजीत मजूमदार ने पार्टी की दिशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि टीएमसी अब एक सांप्रदायिक संगठन बन गई है, जो सभी समुदायों के बजाय मुस्लिम वोट बैंक को प्राथमिकता दे रही है। मजूमदार ने शुक्रवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को अपना इस्तीफा सौंपा, यह बताते हुए कि वे दो दशकों से अधिक समय से पार्टी से जुड़े हुए थे और असम में इसके संस्थापक सदस्यों में से एक थे।


टीएमसी की वर्तमान स्थिति

मजूमदार ने कहा, "मैंने असम में टीएमसी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, लेकिन अब पार्टी अपनी मूल दृष्टि से भटक गई है।" उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शेरमन अली, जो कई पार्टियों से निष्कासित हुए थे, चुनाव से कुछ दिन पहले टीएमसी में शामिल हुए और मुस्लिम बहुल क्षेत्र से जीत हासिल की।


पार्टी के आदर्शों पर सवाल

उन्होंने यह भी कहा कि टीएमसी खुद को भारत की पार्टी बताती है, लेकिन यह ममता बनर्जी द्वारा संचालित बंगाल केंद्रित पार्टी बन गई है। मजूमदार ने आरोप लगाया कि पार्टी ने हिंदुओं की रक्षा करने में विफलता दिखाई है और उन आदर्शों को धोखा दिया है जिन पर इसे स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा, "मेरा अंतरात्मा कहता है कि अब पार्टी छोड़ने का सही समय है।"


पार्टी में हलचल

उनका इस्तीफा टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के पद छोड़ने के कुछ दिनों बाद आया है। दस्तीदार ने स्पष्ट किया कि वह संगठनात्मक जिम्मेदारियों से इस्तीफा देने के बावजूद पार्टी में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में बनी रहेंगी। हाल ही में, तृणमूल कांग्रेस को बंगाल विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, जिससे भाजपा ने राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई।