अमित शाह का महिला आरक्षण पर विपक्ष पर हमला, परिसीमन की आवश्यकता पर जोर
महिला आरक्षण पर विपक्ष की आलोचना
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में बयान दिया कि 'इंडी' गठबंधन के सदस्यों ने महिला आरक्षण का विरोध करते हुए कई शर्तें रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष विधेयक के कार्यान्वयन के तरीके पर नहीं, बल्कि महिला आरक्षण के खिलाफ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे एससी-एसटी सीटों की संख्या में वृद्धि का भी विरोध कर रहे हैं। उनका कहना था कि इन तीन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य है कि महिला सशक्तिकरण के लिए संविधान में सुधार को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए, ताकि 2029 के चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो सके।
परिसीमन की आवश्यकता और इसके प्रभाव
शाह ने कहा कि कई सदस्यों ने परिसीमन के समय पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम में यह उल्लेख है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाएगा, जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि 1971 में इंदिरा गांधी की सरकार ने परिसीमन का प्रावधान किया था, जिसके कारण यह चर्चा में आया।
इतिहास में परिसीमन का महत्व
उन्होंने बताया कि 1972 में इंदिरा गांधी की सरकार ने सीटों की संख्या 525 से बढ़ाकर 545 की थी और फिर इसे फ्रीज कर दिया गया। 1976 में आपातकाल के दौरान परिसीमन पर रोक लगा दी गई थी। शाह ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा परिसीमन से जनता को वंचित रखा है। उन्होंने यह भी बताया कि 1976 में देश की जनसंख्या 56.79 करोड़ थी, जबकि आज यह 140 करोड़ है।
जनगणना और जाति जनगणना का निर्णय
गृह मंत्री ने कहा कि 2021 में जनगणना होनी थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण यह संभव नहीं हो पाई। अब जब 2024 में जनगणना शुरू हो रही है, तो कुछ दलों ने जाति के आधार पर जनगणना की मांग की। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस पर चर्चा की और जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया।
दक्षिण और उत्तर के बीच समानता
शाह ने कहा कि वह 140 करोड़ जनता को स्पष्ट करना चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी की कैबिनेट ने जाति जनगणना कराने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों का इस सदन में उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का है।
