NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, NTA को दी गई सीख

सुप्रीम कोर्ट ने NEET पेपर लीक मामले में NTA को सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसी घटनाएं जारी रहेंगी। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी स्वयं इस मामले की जांच पर नजर रख रहे हैं। NEET-UG परीक्षा 3 मई को हुई थी, लेकिन पेपर लीक के कारण इसे रद्द कर दिया गया। अब 21 जून को री-एग्जाम होगा। जानें इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने और क्या निर्देश दिए हैं।
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NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के मामले में पिछले 20 दिनों से देशभर में प्रदर्शन जारी हैं। इस मामले में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA), यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) और अन्य संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं।


NEET पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, NTA को दी गई सीख
सुप्रीम कोर्ट बोला- UPSC में कभी पेपर लीक नहीं हुआ: NTA को उनसे सीखने की जरूरत


सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को NEET-UG पेपर लीक मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, ऐसी घटनाएं जारी रहेंगी। कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से सवाल किया कि UPSC जैसी बड़ी परीक्षाओं में पेपर लीक नहीं होता, इसलिए NTA को उनसे सीखने की आवश्यकता है।


सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं NEET पेपर लीक की जांच पर नजर रख रहे हैं ताकि कोई चूक न हो।


सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने शिक्षा मंत्रालय से NEET-UG परीक्षाओं की जांच प्रक्रिया का विवरण मांगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि पेपर लीक के बाद बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हम युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर हैं और NEET-UG री-टेस्ट के लिए नए तरीके अपनाए गए हैं।


NEET-UG परीक्षा 3 मई को आयोजित की गई थी, जबकि 7 मई को पेपर लीक की खबर आई थी। इसके बाद 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को री-एग्जाम की तारीख तय की गई।


सुप्रीम कोर्ट ने NTA को भंग करने की याचिकाओं पर सुनवाई की। इस दौरान हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के प्रमुख डॉ. के राधाकृष्णन से पूछा गया कि सिफारिशों और सुधारों के बावजूद नाकामी क्यों हुई।


राधाकृष्णन ने कहा कि समिति की अधिकांश सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं और NEET-PG 2025 सफल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि इस साल सामने आई कमजोरियों को आगामी री-टेस्ट से पहले दूर किया जा रहा है।


कोर्ट ने कहा कि NTA अभी तक स्थायी और मजबूत संस्था के रूप में कार्य नहीं कर रही है। केंद्र सरकार को NTA को मजबूत बनाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए, इस पर भी चर्चा हुई।


जस्टिस नरसिम्हा ने सुझाव दिया कि NTA को IIT और अन्य प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेनी चाहिए ताकि भविष्य में परीक्षाएं सुरक्षित तरीके से आयोजित की जा सकें।


इससे पहले 25 मई को सुनवाई में कोर्ट ने NTA को फटकार लगाई थी और कहा था कि यह दुखद है कि NTA ने पहले हुए पेपर लीक से कोई सबक नहीं लिया।


NEET-UG परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और 14 विदेशी केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। NTA के अनुसार, 7 मई को परीक्षा में गड़बड़ी की सूचना मिली थी।