NEET-UG 2026: पेपर लीक के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश
NEET-UG 2026 में विवादों का नया अध्याय
भारत की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं है, बल्कि जांच एजेंसियों ने एक संगठित नेटवर्क का पता लगाया है, जिसने महाराष्ट्र के लातूर से लेकर राजस्थान के सीकर तक शिक्षा माफिया की गहरी जड़ों को उजागर किया है। CBI, राजस्थान SOG और अन्य एजेंसियों की जांच ने लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है।
सीकर: पेपर लीक का मुख्य केंद्र
जांच के अनुसार, राजस्थान का सीकर कोचिंग हब इस नेटवर्क का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। एजेंसियों को संदेह है कि यहीं से 'गेस पेपर' के नाम पर असली प्रश्नपत्र जैसी सामग्री छात्रों तक पहुंचाई गई। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि वायरल हुए पेपर में लगभग 150 सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे, जो पूरे रैकेट के खुलासे का आधार बना।
गेस पेपर से शुरू हुआ करोड़ों का खेल
जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर लीक नेटवर्क ने छात्रों और अभिभावकों को '100% सेलेक्शन' का लालच देकर लाखों रुपये वसूले। राजस्थान के सीकर में कुछ परिवारों ने अपने बच्चों को लीक पेपर उपलब्ध कराने के लिए 10 लाख रुपये तक खर्च किए। हालांकि, कुछ छात्रों के कम नंबर आने से जांच एजेंसियों को संदेह और गहरा हुआ।
सूत्रों के अनुसार, यह नेटवर्क व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और निजी कोचिंग सर्किल के माध्यम से संचालित हो रहा था। परीक्षा से पहले 'गेस पेपर' नाम से PDF फाइलें भेजी जाती थीं, जिनमें कई सवाल असली पेपर से मिलते थे।
लातूर की भूमिका पर संदेह
महाराष्ट्र का लातूर लंबे समय से मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग का बड़ा केंद्र माना जाता है। अब जांच एजेंसियों को यहां कुछ डॉक्टरों और कोचिंग संचालकों की भूमिका पर संदेह है। CBI ने लातूर के कई संदिग्धों से पूछताछ की है और महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जब्त किए हैं। एक कोचिंग संचालक की गिरफ्तारी के बाद मामला और गंभीर हो गया।
CBI जांच में क्या-क्या सामने आया?
CBI ने अब तक कई गिरफ्तारियां की हैं। हाल ही में पुणे की एक शिक्षिका को भी गिरफ्तार किया गया, जिस पर फिजिक्स पेपर लीक से जुड़े अहम सुराग छिपाने का आरोप है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर परीक्षा से पहले कैसे लीक हुआ और सुरक्षा में कहां चूक हुई।
NTA ने संसद की एक समिति को बताया कि पेपर सीधे उसके सिस्टम से लीक नहीं हुआ। हालांकि, एजेंसियां अब प्रिंटिंग, ट्रांसपोर्टेशन और वितरण चेन की भी जांच कर रही हैं।
छात्रों का भविष्य और बढ़ता गुस्सा
इस विवाद के बाद लाखों छात्रों में भारी नाराजगी है। कई छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों ने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। छात्रों का कहना है कि मेहनत करने वालों के साथ अन्याय हुआ है और शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव और मेडिकल सीटों की सीमित संख्या ऐसे रैकेट को बढ़ावा देती है। NEET जैसी परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं, जबकि सीटें सीमित हैं। यही वजह है कि शिक्षा माफिया इस दबाव का फायदा उठाकर करोड़ों का अवैध कारोबार खड़ा कर लेते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल CBI की जांच जारी है और एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हो सकता है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। इस मामले ने परीक्षा प्रणाली के साथ-साथ देश के कोचिंग मॉडल और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या देश की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं को शिक्षा माफिया से बचाया जा सकेगा, या फिर मेहनती छात्रों का भविष्य इसी तरह दांव पर लगता रहेगा?
