NCERT पाठ्यपुस्तकों में विवाद: इमरजेंसी अध्याय और कर्नाटक की कन्नड़ किताब पर उठे सवाल
NCERT पाठ्यपुस्तकों में विवाद
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों को लेकर हाल ही में दो महत्वपूर्ण विवाद सामने आए हैं। एक ओर, कक्षा 9 की सोशल साइंस किताब में 'इमरजेंसी चैप्टर' के नकली और संशोधित संस्करण के प्रसार का मामला चर्चा में है। दूसरी ओर, कर्नाटक में कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक में पाठ्यक्रम के कथित 'भगवाकरण' को लेकर शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया है.
इमरजेंसी चैप्टर का विवाद
रिपोर्टों के अनुसार, 'इमरजेंसी चैप्टर' कक्षा 9 की सोशल साइंस टेक्स्टबुक का हिस्सा है। NCERT ने एक पोस्ट में बताया कि उसने अनधिकृत और पायरेटेड कॉपियों के प्रसार पर ध्यान दिया है। इस किताब का एक नकली संस्करण सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफार्मों पर साझा किया जा रहा है।
NCERT ने ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है और छात्रों तथा शिक्षकों को सलाह दी है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से NCERT की किताबें प्राप्त करें।
NCERT का आधिकारिक बयान
NCERT ने स्पष्ट किया है कि उसकी पाठ्यपुस्तकें केवल आधिकारिक चैनलों के माध्यम से प्रकाशित की जाती हैं। किसी भी अनधिकृत स्रोत से फैलाए गए कंटेंट पर भरोसा नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह गलत और अधूरा हो सकता है।
NCERT ने कहा कि इस तरह का अनधिकृत प्रसार कॉपीराइट एक्ट, 1957 के तहत दंडनीय है।
कर्नाटक में पाठ्यपुस्तक पर विवाद
कर्नाटक के शिक्षा अधिकार समूह ने NCERT पर आरोप लगाया है कि वह अपनी नई छठी कक्षा की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के माध्यम से पाठ्यक्रम का 'भगवाकरण' कर रही है। समूह का कहना है कि पाठ्यपुस्तक में धार्मिक विषयों को अधिक महत्व दिया गया है, जबकि कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान को नजरअंदाज किया गया है।
पीपल्स अलायंस फॉर फंडामेंटल राइट्स टू एजुकेशन (PAFRE) ने कहा कि पाठ्यपुस्तक का नाम 'कृष्ण' रखने का निर्णय कर्नाटक की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को नजरअंदाज करता है।
