MSMEs को समय पर भुगतान की आवश्यकता पर जोर, मुख्य आर्थिक सलाहकार का बयान
बड़े उद्योगों से MSMEs को समय पर भुगतान की अपील
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि बड़े उद्योगों को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSMEs) को समय पर भुगतान करना चाहिए। इससे उनकी कार्यशील पूंजी की आवश्यकताएं पूरी होंगी और पूंजी की लागत में कमी आएगी। भारतीय उद्योग परिसंघ के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगों को एमएसएमई द्वारा प्रस्तुत बिलों को स्वीकार कर समय पर भुगतान करना चाहिए।
MSMEs की पूंजी लागत अधिक होती है
अनंत नागेश्वरन ने बताया कि देश के बड़े उद्यमों को एमएसएमई की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को कम करने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एमएसएमई को बड़े उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी का स्रोत नहीं बनना चाहिए, बल्कि इसके विपरीत होना चाहिए। इन उद्यमों की पूंजी लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है। उन्होंने यह भी कहा कि एमएसएमई के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध होने से नवाचार के लिए एक सकारात्मक वातावरण बनेगा।
वैश्विक मूल्य श्रृंखला में जुड़ने में कठिनाई
उन्होंने यह भी बताया कि भारत में कई एमएसएमई हैं जो विस्तार करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में बेहतर तरीके से जुड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने एमएसएमई के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाने के प्रयास किए हैं। विभिन्न विभागों के नीतिनिर्माताओं को एमएसएमई के लिए नियमों को सरल, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना चाहिए।
ECLGS को मिली मंजूरी
भारत सरकार MSMEs को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। हाल ही में, सरकार ने MSMEs समेत अन्य क्षेत्रों को समर्थन देने के लिए 18,100 करोड़ रुपये की इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम को मंजूरी दी थी। केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में स्वीकृत इस योजना के माध्यम से 2.55 लाख करोड़ रुपये तक का अतिरिक्त कर्ज प्रवाह सुनिश्चित होने की उम्मीद है।
क्रेडिट गारंटी योजना से MSMEs को सहायता
इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम, पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण MSME और एयरलाइन सेक्टर पर पड़े दबाव को कम करने के लिए लाई गई है। सरकार के आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रस्तावित क्रेडिट गारंटी योजना व्यवसायों को संचालन जारी रखने, रोजगार की सुरक्षा करने, सप्लाई चेन को बनाए रखने और घरेलू उत्पादन को निर्बाध चलाने में मदद करेगी। समय पर तरलता उपलब्ध कराने से न केवल नौकरियों के नुकसान को रोका जा सकेगा, बल्कि पूरे आर्थिक तंत्र की मजबूती भी बनी रहेगी।
