LCA तेजस: भारतीय वायुसेना के लिए नई उड़ान की तैयारी
LCA तेजस की वापसी
भारतीय वायुसेना (IAF) के प्रमुख स्वदेशी लड़ाकू विमान LCA तेजस के लिए 8 अप्रैल एक महत्वपूर्ण दिन साबित होने जा रहा है। फरवरी में एक 'हार्ड लैंडिंग' की घटना के बाद सुरक्षा कारणों से ग्राउंडेड किए गए लगभग 34 विमानों को अब फिर से उड़ान भरने की अनुमति मिल गई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के चेयरमैन डी.के. सुनील ने बताया कि तकनीकी समस्याओं का समाधान कर लिया गया है। यह LCA तेजस से जुड़ी तीसरी घटना है, जिसमें पहले 2024 में इंजन फ्यूल फीड की समस्याओं के कारण एक क्रैश हुआ था, और नवंबर 2025 में दुबई एयर शो में एक और दुर्घटना हुई थी, जिसमें विंग कमांडर नमन स्याल की जान चली गई थी।
तेजस की उड़ान की तैयारी
फरवरी में हुई घटना के कुछ हफ्तों बाद, लगभग 34 LCA विमानों को ग्राउंड किया गया था। अब, दो महीने के इंतज़ार के बाद, तेजस जेट 8 अप्रैल को फिर से उड़ान भरने के लिए तैयार है। HAL के चेयरमैन ने पुष्टि की है कि सभी तेजस जेट अगले बुधवार से उड़ान भरने के लिए तैयार हैं।
तेजस के बार-बार क्रैश होने की चिंताएँ
हालांकि, तेजस के बार-बार क्रैश होने की घटनाओं ने एक पुरानी बहस को फिर से जन्म दिया है। क्या HAL ने इस कार्यक्रम पर समय और धन बर्बाद किया है? 1980 के दशक में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट के चार दशकों बाद भी, यह सवाल उठता है।
भारत की सुरक्षा स्थिति
यह राहत की बात है कि LCA तेजस के बेड़े को फिर से उड़ान भरने की अनुमति मिल गई है। वर्तमान में, भारत को पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के साथ सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। MiG-21 के रिटायर होने के बाद, IAF के फाइटर स्क्वाड्रन पहले से ही कमजोर हो चुके हैं, जिससे तेजस जैसे कॉम्बैट प्लेटफॉर्म की आवश्यकता और भी बढ़ गई है।
IAF की स्थिति
वर्तमान में, IAF के फाइटर स्क्वाड्रनों की संख्या घटकर लगभग 30-32 रह गई है, जबकि मंजूरशुदा संख्या 42 है। IAF अब अपने पाकिस्तानी समकक्ष की तुलना में केवल मामूली बढ़त रखता है, जबकि उसे इस्लामाबाद और बीजिंग दोनों से खतरे का सामना करना पड़ रहा है।
LCA तेजस की उत्पादन प्रक्रिया
MiG-21 की जगह लेने के लिए बनाए गए इस फाइटर जेट का उत्पादन धीमी गति से हो रहा है। जनरल इलेक्ट्रिक (GE) से इंजन की सप्लाई में देरी के कारण HAL ने अमेरिकी कंपनी पर जुर्माना लगाया है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि LCA तेजस एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, भले ही इसमें कुछ कमियाँ हों।
LCA प्रोग्राम की चुनौतियाँ
सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट संदीप उन्नीथन ने LCA प्रोग्राम की धीमी रफ्तार के पीछे संगठनात्मक कमियों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने इसे भारत के न्यूक्लियर सबमरीन प्रोजेक्ट से तुलना की, जो कि एक सफल कार्यक्रम रहा।
LCA तेजस के हादसों पर विशेषज्ञों की राय
मार्च 2024 तक, तेजस ने 50,000 से अधिक घंटे बिना किसी हादसे के उड़ान भरी थी। हालांकि, हाल की घटनाएँ चिंता का विषय बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये घटनाएँ किसी नए फाइटर जेट के लिए सामान्य समस्याएँ हैं।
स्वदेशी इंजन की कमी
कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस में स्वदेशी 'कावेरी इंजन' का न होना एक बड़ा अफसोस है। यह विमान वर्तमान में अमेरिका की GE कंपनी द्वारा सप्लाई किए गए इंजनों पर निर्भर है।
तेजस के फायदे
LCA तेजस का सबसे बड़ा योगदान यह है कि इसने घरेलू एयरोस्पेस कंपनियों का एक नेटवर्क तैयार किया है। हालांकि, उत्पादन की गति धीमी रही है, लेकिन अब तीन उत्पादन लाइनें शुरू की जा रही हैं।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को LCA तेजस को एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में अपनाना होगा। यदि भारत को लड़ाकू विमान प्रौद्योगिकी में महारत हासिल करनी है, तो यह एकमात्र तरीका है।
