KGMU परिसर में लावारिस मजारों का मामला: जांच समिति ने की कार्रवाई

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में बनी छह मजारों को जांच समिति ने लावारिस घोषित किया है। बार-बार नोटिस देने के बावजूद कोई भी वैध संचालक सामने नहीं आया। यह जांच आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई एक गंभीर घटना के बाद शुरू हुई थी। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि ये मजारें अवैध अतिक्रमण हैं और इन्हें स्थानांतरित करने की सिफारिश की गई है। बीजेपी नेता ने इस मामले में मुख्यमंत्री से त्वरित कार्रवाई की मांग की थी। जानें पूरी जानकारी इस लेख में।
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KGMU परिसर में लावारिस मजारों का मामला: जांच समिति ने की कार्रवाई gyanhigyan

लखनऊ: मजारों को लावारिस घोषित किया गया

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के परिसर में स्थित छह मजारों को विश्वविद्यालय की जांच समिति ने लावारिस करार दिया है। समिति की रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि बार-बार नोटिस जारी करने और सुनवाई का अवसर देने के बावजूद कोई भी वैध संचालक या अधिकृत समिति सामने नहीं आई। जांच में यह भी सामने आया कि ये सभी मजारें अवैध रूप से बनाई गई हैं, जिससे अस्पताल में आने वाले मरीजों की आवाजाही में रुकावट उत्पन्न हो रही है.


जांच की शुरुआत आरजी कर केस के बाद

यह जांच अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ हुई रेप और हत्या की घटना के बाद शुरू हुई थी। इसके बाद सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के अनुपालन में परिसर का व्यापक निरीक्षण किया गया, जिससे परिसर को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके.


मजारों की पहचान और स्थिति

निरीक्षण के दौरान कुल आठ मजारों की पहचान की गई, जिनमें 'शाहमीना साहब की दरगाह' और 'हरमैन साहब की मजार' शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि:



  1. इन संरचनाओं में ईंट, टाइल्स और अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये हाल के वर्षों में बनाई गई हैं।

  2. ये मजारें अस्पताल के मरीजों के आवागमन मार्गों में स्थित हैं।

  3. इससे गंभीर मरीजों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न होती है।

  4. कुछ स्थानों पर ऐसी गतिविधियाँ भी देखी गईं, जिन्हें सुरक्षा की दृष्टि से उपयुक्त नहीं माना गया।


नोटिस भेजने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं

समिति ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत कई चरणों में कार्रवाई की:



  1. पहला नोटिस (22 जनवरी 2026): मजारों के संभावित संचालकों को नोटिस जारी किया गया, लेकिन कोई भी व्यक्ति सामने नहीं आया।

  2. दूसरा नोटिस (09 फरवरी 2026): फिर से नोटिस जारी किया गया, लेकिन अधिकांश डाक वापस आ गई।

  3. व्यक्तिगत सुनवाई (04 अप्रैल 2026): सुनवाई के लिए निर्धारित तिथि पर विश्वविद्यालय के अधिकारी उपस्थित रहे, लेकिन किसी भी मजार का प्रतिनिधि नहीं आया।


जांच समिति का निष्कर्ष

इन सभी तथ्यों के आधार पर, जांच समिति ने निष्कर्ष निकाला कि इन मजारों का कोई वैध संचालक या अधिकृत समिति नहीं है, इसलिए इन्हें अवैध अतिक्रमण के रूप में वर्गीकृत किया गया है। समिति ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से सिफारिश की है कि इन लावारिस मजारों को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।


बीजेपी नेता का पत्र

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बीजेपी के वरिष्ठ नेता अभिजित मिश्रा ने पत्र लिखकर इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि KGMU परिसर में सरकारी जमीन पर अवैध मजारें और मस्जिद जैसी संरचनाएं बनी हुई हैं, जो संस्थान के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और सुरक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं.


मिश्रा के गंभीर आरोप

मिश्रा ने अप्रैल 2025 में हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान का हवाला देते हुए कहा कि उस दौरान लगभग 25,000 वर्ग फुट भूमि खाली कराई गई थी, लेकिन कुछ प्रमुख अवैध संरचनाएं अब भी मौजूद हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि केजीएमयू और जिला प्रशासन को शेष सभी अवैध ढांचों को हटाने के निर्देश दिए जाएं।