ITBP जवान ने मां के कटे हाथ के साथ इंसाफ की गुहार लगाई

कानपुर में एक ITBP जवान ने अपनी मां के कटे हाथ के साथ पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में इंसाफ की गुहार लगाई। जवान का आरोप है कि अस्पताल में लापरवाही के कारण उसकी मां का हाथ काटना पड़ा। पुलिस ने उसकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की, जिससे वह मजबूर होकर सबूत के तौर पर मां का कटा हाथ लेकर पहुंचा। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की संवेदनहीनता को उजागर किया है। क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? जानें पूरी कहानी।
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जवान की मां की हालत गंभीर, इंसाफ की तलाश में बेटा

एक ओर जहां जवान की मां अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थी, वहीं दूसरी ओर उसका बेटा सिस्टम से न्याय की मांग कर रहा था। ITBP जवान विकास ने आरोप लगाया कि वह कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत लेकर रेल बाजार थाने के चक्कर लगाता रहा, लेकिन पुलिस ने उसकी एफआईआर दर्ज नहीं की।


कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर के पास पहुंचे जवान


ITBP जवान विकास सिंह ने अपनी मां का कटा हुआ हाथ थर्माकोल के डिब्बे में रखकर कानपुर पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में इंसाफ की गुहार लगाई। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद सभी लोग चौंक गए।


अस्पताल में लापरवाही का आरोप

विकास ने बताया कि 13 मई को उनकी मां को सांस लेने में दिक्कत के कारण कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि डॉक्टरों ने लापरवाही बरती और गलत इंजेक्शन दिया, जिससे मां के दाहिने हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें पारस अस्पताल रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने हाथ काटने की सलाह दी।


पुलिस ने नहीं की FIR दर्ज

जब विकास ने पुलिस से शिकायत की, तो उनकी एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इस स्थिति ने उन्हें मजबूर किया कि वे अपने मां के कटे हाथ को सबूत के रूप में लेकर कमिश्नर के पास पहुंचे।


जांच के आदेश

कमिश्नर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कानपुर के सीएमओ को एक विशेष मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया, ताकि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा सके।


स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

यह घटना हमारे समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करती है। सवाल उठता है कि क्या दोषी डॉक्टरों और लापरवाह पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी, या यह मामला भी जांच की फाइलों में दब जाएगा?


अस्पतालों की विश्वसनीयता पर संदेह

क्या अस्पताल अब केवल पैसे कमाने की मशीन बन गए हैं? यदि एक सैनिक के परिवार के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिक की स्थिति क्या होगी? यह घटना चिकित्सा जगत पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।