ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफे पर रोक, महत्वपूर्ण मिशनों की सुरक्षा के लिए नया निर्देश

हाल ही में ISRO में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबरों के बीच, अंतरिक्ष विभाग ने एक ज्ञापन जारी किया है, जिसमें गगनयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों पर कार्यरत वैज्ञानिकों के इस्तीफे को स्वीकार न करने का निर्देश दिया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
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ISRO के वैज्ञानिकों के इस्तीफे पर रोक

हाल के समय में 100 से अधिक वैज्ञानिकों द्वारा इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदन देने की खबरों के बीच, अंतरिक्ष विभाग ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के प्रमुख केंद्रों को एक ज्ञापन जारी किया है। इस ज्ञापन में निर्देश दिया गया है कि गगनयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों पर कार्यरत वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के अनुरोधों को स्वीकार न किया जाए। यह मेमोरेंडम मंगलवार को जारी किया गया और यह मुख्य रूप से ग्रुप 'A' के वैज्ञानिक और तकनीकी कर्मचारियों के लिए है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विभाग ने ISRO सेंटर्स को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इन कर्मचारियों के इस्तीफे या वॉलंटरी रिटायरमेंट के अनुरोधों को सामान्यतः स्वीकार न करें।


मेमोरेंडम का उद्देश्य

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि हाल ही में ISRO के ग्रुप 'A' के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों से वॉलंटरी रिटायरमेंट और इस्तीफे के अनुरोधों की संख्या में वृद्धि हुई है। इनमें वे कर्मचारी भी शामिल हैं जो गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े हैं, जिससे राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट्स पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि गगनयान और अन्य महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के स्वैच्छिक रिटायरमेंट और इस्तीफे के अनुरोधों को सामान्य प्रक्रिया के तहत स्वीकार नहीं किया जाएगा। मेमोरेंडम में यह भी कहा गया है कि वैज्ञानिक और तकनीकी स्टाफ की किसी भी रिक्वेस्ट को अंतिम निर्णय के लिए डायरेक्टर की "साफ़ सिफ़ारिशों" के साथ विभाग को भेजा जाना चाहिए। यह ज्ञापन यूआर राव सैटेलाइट सेंटर (URSC) और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) को जारी किया गया है।


क्यों उठाया गया यह कदम?

यह कदम तब उठाया गया है जब पिछले एक महीने में देशभर के विभिन्न सेंटर्स से 100 से अधिक वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इस्तीफे की इच्छा जताई है। हालांकि स्पेस एजेंसी ने सही संख्या का खुलासा नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक के बेंगलुरु में UR राव सैटेलाइट सेंटर से 80 से अधिक वैज्ञानिक जा चुके हैं, जबकि केरल के तिरुवनंतपुरम में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर से लगभग 20 लोगों के जाने की खबर है। ISRO के चेयरमैन वी. नारायण ने कहा कि संगठन इन इस्तीफों का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि हाँ, कई लोग जाते हैं, लेकिन यह हर संगठन का हिस्सा है। इस मेमोरेंडम का उद्देश्य केवल लोगों को बनाए रखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि आवश्यक परियोजनाओं पर अचानक कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। यदि कोई फिर भी जाता है, तो कोई और जिम्मेदारी ले लेगा। हम इस पर ध्यान दे रहे हैं।