ISRO का PSLV मिशन: तकनीकी खराबी के बावजूद मिली राहत
मिशन में आई तकनीकी समस्या
सोमवार को इसरो का पीएसएलवी रॉकेट मिशन तकनीकी खराबी के कारण असफल रहा, लेकिन मंगलवार को एक सकारात्मक खबर आई। इस मिशन में शामिल स्पेन की एक निजी कंपनी का छोटा स्पेस कैप्सूल सुरक्षित बच गया है, और इससे जमीन पर सिग्नल प्राप्त होने की पुष्टि हुई है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि रॉकेट के विफल होने के बावजूद, कैप्सूल ने लगभग 190 सेकंड तक उड़ान का डेटा भेजा। आमतौर पर, ऐसी परिस्थितियों में किसी भी उपकरण से डेटा प्राप्त नहीं होता। कैप्सूल को धरती के वातावरण में पुनः प्रवेश के परीक्षण के लिए विकसित किया गया था।
15 सैटलाइट्स का हुआ नुकसान
पीएसएलवी सी 62 ने सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा से उड़ान भरी थी। इस रॉकेट में भारत का उपग्रह अन्वेषा सहित कुल 15 सैटलाइट्स और एक स्पेन का कैप्सूल शामिल था। रॉकेट के तीसरे चरण में तकनीकी खराबी के कारण ये सैटलाइट्स लापता हो गए।
अन्य उपग्रहों की जानकारी
लापता उपग्रहों में डीआरडीओ का अन्वेषा उपग्रह शामिल है, जो लगभग 500 किलोमीटर की दूरी से सैन्य छलावरण को उजागर करने वाला एक रणनीतिक सुपर-आई है। इसके अलावा, भारत का पहला इन-ऑर्बिट ईंधन भरने वाला उपग्रह, आयुलसैट, और आपातकालीन संचार तथा आपदा प्रबंधन के लिए डिज़ाइन किया गया एक छोटा, छात्रों द्वारा विकसित निम्न पृथ्वी कक्षा (एलईओ) उपग्रह, सीजीयूसैट भी शामिल थे। पृथ्वी अवलोकन उपग्रह का निर्माण थाईलैंड और ब्रिटेन ने मिलकर किया था। मई 2025 में किया गया एक पिछला प्रयास (पीएसएलवी-सी61-ईओएस-09) भी "मोटर दबाव की समस्या" के कारण असफल रहा था। इसरो के एक पूर्व शीर्ष वैज्ञानिक ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी को डेटा एकत्र करने, विश्लेषण करने, घटना को समझने और आवश्यक सुधार करने में कुछ समय लगेगा। उम्मीद है कि इसरो आने वाले दिनों में आधिकारिक निष्कर्ष जारी करेगा।
