ISRO का गगनयान मिशन: सफल एयर ड्रॉप टेस्ट से मिली नई उपलब्धि

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गगनयान मिशन के तहत एक महत्वपूर्ण एयर ड्रॉप टेस्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस परीक्षण में वैज्ञानिकों ने क्रू मॉड्यूल के रिकवरी सिस्टम का परीक्षण किया, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करता है। भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा उठाए गए कृत्रिम क्रू मॉड्यूल को समुद्र में निर्धारित ड्रॉप जोन पर छोड़ा गया। इस सफल परीक्षण ने गगनयान G1 मिशन की तैयारियों में एक नई ऊर्जा प्रदान की है।
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गगनयान मिशन का दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट

ISRO का गगनयान मिशन: सफल एयर ड्रॉप टेस्ट से मिली नई उपलब्धि

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने गगनयान मिशन के तहत एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन स्पेस स्टेशन पर गगनयान मिशन का दूसरा इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने क्रू मॉड्यूल के रिकवरी सिस्टम का परीक्षण किया, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से धरती पर लौट सकें।

चिनूक हेलीकॉप्टर द्वारा क्रू मॉड्यूल की लिफ्टिंग
ISRO ने अपनी वेबसाइट पर जानकारी दी कि इस परीक्षण में भारतीय वायु सेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने लगभग 5.7 टन वजन के एक कृत्रिम क्रू मॉड्यूल को लगभग 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठाया। इसे श्रीहरिकोटा के तट के निकट समुद्र में निर्धारित ड्रॉप जोन पर छोड़ा गया। इस दौरान क्रू मॉड्यूल के नीचे 4 प्रकार के 10 पैराशूट एक क्रम में तैनात किए गए, जिससे लैंडिंग के समय गति धीरे-धीरे कम हो सकी।

गगनयान G1 मिशन के लिए महत्वपूर्ण परीक्षण
स्पेस एजेंसी के अनुसार, भारतीय नौसेना के सहयोग से कृत्रिम मॉड्यूल को सफलतापूर्वक पुनः प्राप्त किया गया। IADT-02 परीक्षण ने क्रू मॉड्यूल में पैराशूट आधारित डिक्लेरेशन सिस्टम की पुष्टि की है। ISRO ने बताया कि यह परीक्षण गगनयान G1 मिशन की तैयारियों में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इसमें भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेना और DRDO की भागीदारी रही।

परीक्षण से मिली जानकारी
ISRO की इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि क्रू मॉड्यूल का रिकवरी सिस्टम वास्तविक परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य कर सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस प्रकार के परीक्षण अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, क्योंकि किसी भी आपात स्थिति में यह उनकी जान बचाने में सहायक हो सकता है। इस सफल परीक्षण ने भारत को गगनयान मिशन की आगे की तैयारियों के लिए एक नई ऊर्जा प्रदान की है।