वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा: नए सहयोग की शुरुआत
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत में तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देना है। इस यात्रा के दौरान उन्होंने बोध गया का दौरा किया और महाबोधि मंदिर में पूजा अर्चना की। राष्ट्रपति का यह दौरा भारत और वियतनाम के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इस यात्रा से दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलने की संभावना है।
| May 5, 2026, 16:58 IST
वियतनाम के राष्ट्रपति का भारत दौरा
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत में तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देना है। उन्होंने बिहार के गयाजी में पहुंचकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के पुराने संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।
बोध गया का दौरा
राष्ट्रपति तो लाम ने अपने प्रवास के दौरान बोध गया का भी दौरा किया, जो भगवान बुद्ध के ज्ञान की प्राप्ति का स्थल है। उन्होंने महाबोधि मंदिर में पूजा अर्चना की और वहां के आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। यह यात्रा न केवल कूटनीतिक है, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव को भी दर्शाती है। 2011 में, उन्होंने वियतनाम के बाक निन्ह में फाट तिक पगोडा में बोधि वृक्ष का रोपण किया था, जो बोध गया से लाया गया था।
भारत में औपचारिक स्वागत
राष्ट्रपति तो लाम, जो वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव भी हैं, हाल ही में राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं और यह उनका भारत का पहला दौरा है। यह यात्रा 7 मई तक चलेगी, जिसमें 6 मई को राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी विस्तृत चर्चा होगी, जिसमें द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत की जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी उनसे मिलेंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलने की संभावना है।
ऐतिहासिक संबंध
भारत और वियतनाम के संबंध ऐतिहासिक और सभ्यतागत रूप से मजबूत रहे हैं। 2016 में दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी स्थापित की गई थी, जिसकी अब दसवीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति तो लाम की यात्रा विशेष महत्व रखती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें राष्ट्रपति बनने पर बधाई दी थी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में दोनों देशों की मित्रता और मजबूत होगी।
रक्षा सहयोग
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। दोनों देश दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता बनाए रखने के पक्षधर हैं और समुद्री सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग तथा सैन्य प्रशिक्षण में साझेदारी बढ़ा रहे हैं। भारत वियतनाम को रक्षा उपकरण, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता भी प्रदान कर रहा है। इस सहयोग का सामरिक असर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
आर्थिक संबंध
आर्थिक दृष्टि से भी भारत और वियतनाम के संबंध तेजी से विकसित हो रहे हैं। 2016 में व्यापार लगभग 5.4 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 16.46 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। 2026 की पहली तिमाही में व्यापार 4.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत अधिक है। वियतनाम से भारत को मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक सामान, मशीनरी और कृषि उत्पादों का निर्यात होता है, जबकि भारत से वियतनाम को वस्त्र सामग्री, प्लास्टिक, औषधियां और इस्पात भेजा जाता है।
निवेश और सहयोग
जब कंपनियां अपने उत्पादन केंद्रों का विस्तार कर रही हैं, तब भारत और वियतनाम क्षेत्रीय आपूर्ति श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय कंपनियां वियतनाम के बीस से अधिक प्रांतों में परियोजनाएं चला रही हैं, जबकि वियतनामी कंपनियां भी भारत में निवेश बढ़ा रही हैं। वस्त्र और जूता उद्योग में सहयोग की नई संभावनाएं उभर रही हैं। इसके अलावा डिजिटल प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और विनिर्माण में भी साझेदारी मजबूत हो रही है।
यात्रा का महत्व
राष्ट्रपति तो लाम की यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने का अवसर है। यह यात्रा भविष्य में भारत और वियतनाम के बीच सहयोग को और गहरा और व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
