IIT कानपुर में अनोखी शादी: विदाई परंपरा का 32वां वर्ष

IIT कानपुर में पिछले सप्ताह एक अनोखी शादी का आयोजन हुआ, जो पिछले 32 वर्षों से विदाई परंपरा का हिस्सा है। इस शादी में छात्रों ने विज्ञान और गणित के सूत्रों को मंत्रों की तरह पढ़ा और बीटेक के नोट्स को अग्निकुंड में डाला। इस समारोह में फिल्मी ड्रामे का भी समावेश था, जिसमें पूर्व प्रेमी ने शादी रोकने की कोशिश की। इस अनोखी परंपरा का उद्देश्य छात्रों के बीच आपसी तालमेल और विदाई के गम को खुशी में बदलना है।
 | 
IIT कानपुर में अनोखी शादी: विदाई परंपरा का 32वां वर्ष gyanhigyan

IIT कानपुर की अनोखी विदाई परंपरा

कानपुर समाचार: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर का परिसर आमतौर पर गंभीर शोध और जटिल समीकरणों के लिए जाना जाता है, लेकिन पिछले सप्ताह यहां का माहौल कुछ खास था। यह अवसर था संस्थान की ऐतिहासिक और हास्य-व्यंग्य से भरी ‘अनोखी शादी’ का, जो पिछले 32 वर्षों से IIT कानपुर की विदाई परंपरा का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।


IIT कानपुर में अनोखी शादी: विदाई परंपरा का 32वां वर्ष
IIT कानपुर में दूल्हा-दुल्हन बने छात्र, B.Tech नोट्स बने हवन सामग्री; 32 साल से निभाई जा रही ये अनोखी परंपरा


इस विवाह की सबसे खास बात इसकी रस्में थीं। आम शादियों में संस्कृत के श्लोक पढ़े जाते हैं, जबकि यहां ‘पंडित’ बने छात्रों ने विज्ञान और गणित के जटिल सूत्रों को मंत्रों की तरह पढ़ा। जब फेरों के लिए अग्निकुंड जलाया गया, तो उसमें बीटेक के नोट्स को समिधा के रूप में डाला गया। यह चार साल के कठिन शैक्षणिक सफर की समाप्ति और प्लेसमेंट के तनाव से मुक्ति का प्रतीक था।




शादी में फिल्मी ड्रामे की कोई कमी नहीं थी। बारात जब ‘हाल-1’ से निकलकर छात्राओं के हॉस्टल ‘हाल-6’ पहुंची, तो अचानक ‘एक्स-बॉयफ्रेंड’ की एंट्री हुई। हाथ में नकली पिस्टल और डंडे लिए छात्र ने हंगामा किया और शादी रोकने की कोशिश की। इसके बाद दूल्हे और पूर्व प्रेमी के बीच तलवारबाजी और शेरो-शायरी का मुकाबला हुआ। अंततः बारातियों और दुल्हन के फैसले के बाद ‘सच्चे प्यार’ की जीत हुई और विवाह संपन्न हुआ।


इस वर्ष की शादी में बीटेक अंतिम वर्ष के छात्र कुमार विशाल दूल्हा बने, जबकि विदित परमार ने दुल्हन का किरदार निभाया। शादी की औपचारिकताएं किसी वास्तविक विवाह से कम नहीं थीं। हल्दी और मेहंदी की रस्में हुईं, जहां छात्राओं के हॉस्टल में संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया गया और जमकर नृत्य हुआ। द्वारचार में दुल्हन की सहेलियों ने दूल्हे को द्वार पर रोककर उपहार की मांग की। वरमाला के लिए विदित और विशाल ने एक-दूसरे को वरमाला पहनाई।



संस्थान के शिक्षकों के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत 1994 बैच के छात्रों ने की थी। तब से हर साल अंतिम वर्ष के छात्र इसे आयोजित करते हैं। यह आयोजन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि छात्रों के बीच आपसी तालमेल और विदाई के गम को खुशी में बदलने का एक जरिया है।


शिक्षकों का मानना है कि देश के सबसे तेज दिमाग वाले ये युवा न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हैं, बल्कि उनकी रचनात्मकता और जड़ों से जुड़े रहने का एक अनूठा नजरिया भी है। वर्तमान में इस अनोखी शादी के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसे नेटिजन्स आइआइटियंस का बेहतरीन ‘क्रिएटिव ब्रेक’ बता रहे हैं।