IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारियों की गिरफ्तारी: 645 करोड़ रुपये के गबन का मामला

प्रवर्तन निदेशालय ने IDFC फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारियों को 645 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि यह राशि शेल कंपनियों के माध्यम से निकाली गई। ED ने इस मामले में और भी गहराई से जांच करने का आश्वासन दिया है, जिससे इस गबन के पीछे के नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
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IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व कर्मचारियों की गिरफ्तारी: 645 करोड़ रुपये के गबन का मामला gyanhigyan

प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई

चंडीगढ़/नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 645 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए IDFC फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। ED के चंडीगढ़ कार्यालय ने 11 मई को रिभव ऋषि और अभय कुमार को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत हिरासत में लिया। इन दोनों आरोपियों को एक विशेष PMLA अदालत में पेश करने के बाद 21 मई तक के लिए 10 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया गया।


645 करोड़ रुपये का गबन

सरकारी खातों से धन की चोरी


ED की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। यह पता चला है कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और चंडीगढ़ तथा पंचकूला में स्थित दो निजी स्कूलों के IDFC फर्स्ट बैंक में रखे सरकारी खातों से 645 करोड़ रुपये का गबन किया गया। यह राशि शेल कंपनियों के जटिल नेटवर्क के माध्यम से निकाली गई।


शेल कंपनियों का उपयोग

रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी इकाइयाँ


ED के अनुसार, मुख्य आरोपी रिभव ऋषि ने अपने निजी सहायक और ड्राइवर के नाम पर ‘कैपको फिनटेक सर्विसेज़’ और ‘RS ट्रेडर’ जैसी शेल कंपनियाँ स्थापित कीं। इसी तरह, दूसरे आरोपी अभय कुमार ने अपनी पत्नी और साले के नाम पर ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स’ नामक एक फर्जी इकाई बनाई। ED ने बताया कि इन शेल संस्थाओं को विभिन्न सरकारी विभागों के खातों से सीधे तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का फंड प्राप्त हुआ। इसके बाद, धन की लेयरिंग कर उसे निकाल लिया गया।


जांच जारी

मनी ट्रेल की खोज


केंद्रीय एजेंसी ने यह स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी भी चल रही है। ED पूरे मनी ट्रेल का पता लगाने, इस गबन के अन्य लाभार्थियों और अपराध की आय से अर्जित संपत्तियों की पहचान करने में जुटी है। इस गिरफ्तारी के बाद सरकारी धन की हेराफेरी से जुड़े इस नेटवर्क के कई और तार खुलने की संभावना है।