GB रोड: दिल्ली के कुख्यात रेड लाइट एरिया का रहस्य

दिल्ली का GB रोड, जो अपने कुख्यात रेड लाइट एरिया के लिए जाना जाता है, एक रहस्यमय इतिहास समेटे हुए है। यहां दिन में हार्डवेयर की दुकानें होती हैं, जबकि रात में यह स्थान महिलाओं की जिंदगी का नर्क बन जाता है। जानें इस क्षेत्र का असली मालिक कौन है और इसके पीछे की कहानी क्या है।
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GB रोड का परिचय

GB रोड: दिल्ली के कुख्यात रेड लाइट एरिया का रहस्य


दिल्ली की गलियों में जब भारत के सबसे कुख्यात रेड लाइट एरिया की चर्चा होती है, तो सबसे पहले GB रोड का नाम सामने आता है। यह वह स्थान है जहां दिन के समय हार्डवेयर और ऑटो पार्ट्स की दुकानें भरी रहती हैं, लेकिन रात होते ही ऊपरी मंजिलों पर हजारों महिलाओं की जिंदगी एक अलग ही रूप ले लेती है।


GB रोड का इतिहास

GB रोड का पूरा नाम गारस्टिन बेस्टियन रोड है, जिसे 1966 में आधिकारिक तौर पर स्वामी श्रद्धानंद मार्ग के नाम से जाना गया। यह दिल्ली के ओल्ड सिटी, शाहजहाँनाबाद में अजमेरी गेट से लाहौरी गेट तक फैला हुआ एक 800 मीटर लंबा मार्ग है। दिन के समय यह एशिया के सबसे बड़े हार्डवेयर मार्केट के रूप में प्रसिद्ध है, जहां कार पार्ट्स, मशीनरी और प्लंबिंग का सामान बिकता है। लेकिन रात में ग्राउंड फ्लोर की दुकानें बंद हो जाती हैं और ऊपरी मंजिलों पर 100 से अधिक ब्रोथल सक्रिय हो जाते हैं। अनुमान है कि यहां 1,000 से 4,000 महिलाएं और लड़कियां रहती हैं, जो नेपाल, बंगाल, कर्नाटक और यूपी से लाई जाती हैं।


GB रोड का मालिक कौन है?

अब सवाल उठता है कि इस क्षेत्र का मालिक कौन है। असल में, GB रोड का कोई एक मालिक नहीं है। यह एक सार्वजनिक सड़क है, जो दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के अधीन आती है। हालांकि, ब्रोथल्स के मालिक अलग-अलग हैं। अधिकांश प्राइवेट प्रॉपर्टी ओनर्स या 'मल्किन' के पास हैं। इतिहास बताता है कि यह सब ब्रिटिश राज का परिणाम है। मुगल काल में दिल्ली में पांच अलग-अलग रेड लाइट एरिया थे, जहां तवायफ़ों के कोठे और कला का विकास हुआ। लेकिन 1857 की क्रांति के बाद ब्रिटिशों ने सभी कोठों को बंद कर दिया, सिवाय एक के। ईस्ट इंडिया कंपनी के ब्रिटिश कमिश्नर जॉन गारस्टिन ने इन सभी को एक जगह समेकित कर दिया, जो उनके नाम पर था। इस प्रकार, इस क्षेत्र का कोई एक मालिक नहीं है, बल्कि यह विभिन्न प्राइवेट प्रॉपर्टी और सरकारी जमीनों पर बनी इमारतों का मिश्रण है।