DMK की शर्तों पर केंद्र सरकार का समर्थन: परिसीमन विधेयक पर नई हलचल

DMK ने परिसीमन विधेयक के समर्थन के लिए केंद्र सरकार से तीन शर्तें रखी हैं, जिसमें 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या पर रोक को बढ़ाने की मांग शामिल है। इसके अलावा, सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में समान वृद्धि की भी मांग की गई है। NDA इस विधेयक को पास कराने के लिए प्रयासरत है, जबकि DMK का समर्थन मिलने से उनकी ताकत बढ़ सकती है। जानें इस मुद्दे पर और क्या चल रहा है।
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परिसीमन संशोधन विधेयक पर राजनीतिक गतिविधियाँ

देश की राजनीति में 'परिसीमन संशोधन विधेयक' को लेकर हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अगुवाई में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) केंद्र की मोदी सरकार को इस विधेयक का समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। हालांकि, इसके लिए DMK ने केंद्र सरकार से तीन महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं।


DMK की प्रमुख शर्तें

पहली शर्त के अनुसार, DMK चाहती है कि 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों की संख्या पर लगी रोक (फ्रीज) बनी रहे, जो 2027 में समाप्त होने वाली है। पार्टी का मानना है कि इस रोक को संविधान संशोधन के माध्यम से 25 साल और बढ़ाया जाना चाहिए।


दूसरी शर्त में, DMK ने सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि की मांग की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में इस संबंध में आश्वासन दिया था।


इन दोनों शर्तों के अलावा, DMK यह भी चाहती है कि केंद्र सरकार नए कानून के साथ सभी राज्यों के बदले हुए लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची जारी करे।


DMK का समर्थन और विरोध

पार्टी के सूत्रों ने बताया कि यदि केंद्र सरकार इन तीनों शर्तों को मानने का निर्णय लेती है, तो DMK परिसीमन विधेयक का समर्थन करने को तैयार है। हालांकि, अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा विधेयक के अंतिम ड्राफ्ट की समीक्षा के बाद ही लिया जाएगा।


DMK ने पहले इस विधेयक का विरोध किया है, इसे राज्यों, विशेषकर दक्षिण के राज्यों के हितों के खिलाफ बताया है। लेकिन कांग्रेस के साथ DMK का गठबंधन खत्म होने के बाद, अटकलें लगाई जा रही हैं कि DMK इस विधेयक का समर्थन कर सकती है।


NDA की स्थिति

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) इस विधेयक को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहा है। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी, जिससे महिला आरक्षण कानून लागू किया जा सके।


जब यह विधेयक पहले अप्रैल में पेश किया गया था, तो इसे 298 वोट मिले थे। इसमें जगनमोहन रेड्डी की YSRCP और ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) का समर्थन शामिल था। हालांकि, इसे पास कराने के लिए 360 वोटों की आवश्यकता होगी।


NDA की सदस्यता

वर्तमान में लोकसभा में NDA के पास 319 सदस्य हैं। यह संख्या तब बढ़ी जब शिवसेना (UBT) के सात सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए। DMK के 22 लोकसभा सदस्य हैं, जिनके समर्थन से NDA की ताकत 341 हो जाएगी।


इसके अलावा, NCP(SP) के आठ सांसदों के समर्थन की भी चर्चा है, लेकिन इस पर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। यदि YSRCP और ZPM फिर से समर्थन करते हैं, तो NDA की ताकत 354 हो जाएगी।


विशेष सत्र की संभावना

कयास लगाए जा रहे थे कि केंद्र सरकार परिसीमन विधेयक के लिए 16 से 18 अगस्त तक विशेष सत्र बुला सकती है, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर इस दौरान कोई विशेष सत्र नहीं बुलाया जाएगा।


संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होगा।