भारतीय वायुसेना के कार निकोबार एयरबेस का नया रनवे उद्घाटन

भारतीय वायुसेना ने कार निकोबार एयरबेस का नया रनवे उद्घाटन किया है, जो न केवल सुरक्षा तंत्र को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति को भी बढ़ाएगा। यह एयरबेस अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है और इसका ऐतिहासिक महत्व है। 1942 से 1945 के बीच जापान द्वारा निर्मित रनवे के बाद, इसे भारतीय वायुसेना ने 1956 में अपने उपयोग में लिया। इस एयरबेस का महत्व समय के साथ बढ़ा है, और यह समुद्री निगरानी और तटीय रक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जनरल चौहान ने इस क्षेत्र की भू-रणनीतिक क्षमता और एक्ट ईस्ट नीति पर ध्यान केंद्रित किया।
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भारतीय वायुसेना के कार निकोबार एयरबेस का नया रनवे उद्घाटन

कार निकोबार एयरबेस का उद्घाटन

भारतीय वायुसेना के कार निकोबार एयरबेस का नया रनवे आज सीडीएस जनरल अनिल चौहान द्वारा उद्घाटन किया गया। यह कदम न केवल हमारे सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करेगा, बल्कि ईस्टर्न इंडियन ओशियन में भारत की सैन्य शक्ति को भी बढ़ाएगा। यह एयरबेस अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है, जो समुद्री सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसका इतिहास भी काफी रोचक है; 1942 से 1945 के बीच जब जापान ने इन द्वीपों पर कब्जा किया था, तब यहां का रनवे जापानियों द्वारा बनाया गया था। 1956 में भारतीय वायुसेना ने इसे अपनी सुरक्षा के लिए उपयोग करना शुरू किया, और इसका मुख्य कार्य रिफ्यूलिंग के रूप में विमान को ईंधन प्रदान करना था।


एयरफोर्स स्टेशन का महत्व

इस एयरफोर्स स्टेशन का महत्व समय के साथ बढ़ता गया, और 1967 में इसका रनवे भी विस्तारित किया गया। 1982 में यहां Mi8 हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए। 2004 में आई सुनामी के दौरान इस एयरबेस को काफी नुकसान हुआ, लेकिन हमारे जवानों ने इसे केवल तीन महीने में पुनः तैयार कर दिया। यह भारतीय वायुसेना के कर्मियों की मेहनत और तत्परता का एक उदाहरण है।


रणनीतिक महत्व

कार निकोबार एयरबेस, पोर्ट ब्लेयर से लगभग 535 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है, जो भारत का सबसे दक्षिणी रणनीतिक क्षेत्र है। यह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट है, जो विश्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यह एयरबेस भारतीय वायुसेना की एक प्रमुख अग्रिम चौकी के रूप में कार्य करता है और समुद्री निगरानी, त्वरित हवाई प्रतिक्रिया, पनडुब्बी रोधी और तटीय रक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


एक्ट ईस्ट नीति पर ध्यान

कमान के एक अधिकारी ने बताया कि सीडीएस की यह यात्रा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के रणनीतिक महत्व और एक्ट ईस्ट नीति पर ध्यान केंद्रित करती है। जनरल चौहान ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत की और इस क्षेत्र की भू-रणनीतिक क्षमता को रेखांकित किया। उन्होंने एएनसी की राष्ट्र निर्माण में भूमिका और सैन्य अभियानों के समर्थन में इसके योगदान को भी उजागर किया।