INS महेंद्रगिरि का भारतीय नौसेना में शामिल होना: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापत्तनम में INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल किया, जो आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा का प्रतीक है। यह छठा स्टील्थ फ्रिगेट है, जो स्वदेशी तकनीक से निर्मित है। इस युद्धपोत के शामिल होने से भारतीय नौसेना की क्षमताओं में वृद्धि होगी और यह भारत के समुद्री हितों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। जानें इस युद्धपोत की विशेषताएँ और इसके महत्व के बारे में।
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INS महेंद्रगिरि का भारतीय नौसेना में समावेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को विशाखापत्तनम के नेवल डॉकयार्ड में INS महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल किया। यह नीलगिरि-क्लास का छठा स्टील्थ फ्रिगेट है, जो भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम में नौसेना के उच्च अधिकारी, जिनमें नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन भी शामिल थे, उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजनाथ सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया। महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया यह युद्धपोत भारतीय नौसेना का पहला जहाज है। नौसेना के अनुसार, यह फ्रिगेट ताकत, मजबूती और अटूट संकल्प का प्रतीक है, और यह भारत के समुद्री इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ने की उम्मीद है।  


'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक कदम

'आत्मनिर्भर भारत' विज़न का सबूत: राजनाथ

कमीशनिंग समारोह से पहले, राजनाथ सिंह शुक्रवार शाम विशाखापत्तनम पहुंचे, जहां नेवल स्टाफ़ के चीफ़ एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने उनका स्वागत किया। रक्षा मंत्री ने इस कमीशनिंग को देश और भारतीय नौसेना के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "मैं विशाखापत्तनम जा रहा हूँ, जहां 11 जुलाई 2026 को छठे प्रोजेक्ट 17A स्टील्थ फ्रिगेट, 'महेंद्रगिरि' की कमीशनिंग सेरेमनी होगी।" इस युद्धपोत को भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह जहाज देश में ही डिज़ाइन और निर्मित किया गया है, जो हमारे 'आत्मनिर्भर भारत' विज़न और घरेलू रक्षा उद्योगों की क्षमताओं का प्रमाण है। महेंद्रगिरि भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और सुरक्षित इंडो-पैसिफ़िक के लिए हमारे संकल्प को मज़बूत करने के लिए तैयार है।


INS महेंद्रगिरि की विशेषताएँ

INS महेंद्रगिरि 'आत्मनिर्भर भारत' की सफलता को दर्शाता है

यह युद्धपोत भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा डिज़ाइन किया गया है और मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स द्वारा निर्मित किया गया है। यह प्रोजेक्ट 17A के तहत छठा जहाज है, जो स्वदेशी तकनीक और निर्माण क्षमताओं का उपयोग करके एडवांस्ड युद्धपोत डिज़ाइन करने में भारत की महारत को दर्शाता है। INS महेंद्रगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो सरकार की 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की सफलता को दर्शाता है। इसके निर्माण में भारतीय उद्योगों के एक बड़े नेटवर्क ने योगदान दिया है, जिससे घरेलू रक्षा निर्माण इकोसिस्टम मजबूत हुआ है और रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं।


INS महेंद्रगिरि का महत्व

यह स्टील्थ फ्रिगेट स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है, जिससे यह एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसके अलावा, यह समुद्री सुरक्षा मिशन, खोज और बचाव अभियान, मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। INS महेंद्रगिरि के शामिल होने से भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमताओं में वृद्धि होने की उम्मीद है, और यह भारत को स्वदेशी युद्धपोत बनाने वाले प्रमुख देशों में से एक के रूप में स्थापित करेगा। जैसे-जैसे अन्य प्रोजेक्ट 17A फ्रिगेट बेड़े में शामिल होंगे, नौसेना की युद्ध की तैयारी और रणनीतिक पहुंच में सुधार होगा।