CLAT 2026 पेपर लीक विवाद: सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर
CLAT 2026 पेपर लीक का मामला
क्लैट 2026 का आयोजन 7 दिसंबर को किया गया था।
CLAT 2026 पेपर लीक: कॉमन लॉ एप्टीट्यूड टेस्ट (CLAT) 2026, जो लॉ अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सों में प्रवेश के लिए आयोजित किया गया था, अब विवादों में है।कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (एनएलयू) द्वारा आयोजित इस परीक्षा के पेपर लीक के आरोप सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गए हैं।इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें पेपर लीक की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच की मांग की गई है।
आइए जानते हैं कि क्लैट 2026 पेपर लीक से संबंधित सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं और कब यह परीक्षा आयोजित की गई थी।
सोशल मीडिया पर लीक का दावा
जनहित याचिका में यह दावा किया गया है कि व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य प्लेटफार्मों पर साझा की गई वीडियो, तस्वीरें और डिजिटल सामग्री से यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा से पहले ही पेपर और उत्तर कुंजी अवैध रूप से प्राप्त की गई थी।याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे हजारों वास्तविक उम्मीदवारों को नुकसान हुआ है।यह याचिका SC, OBC और EWS पृष्ठभूमि के लॉ कैंडिडेट्स के एक समूह द्वारा दायर की गई है।
क्लैट 2026 को फिर से आयोजित करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि यदि पेपर लीक के आरोप सही साबित होते हैं, तो एक स्वतंत्र समिति की निगरानी में नई परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया जाए।उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि इस लीक ने परीक्षा की पवित्रता को गंभीर नुकसान पहुंचाया है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का माहौल बिगड़ गया है।याचिका में यह तर्क भी दिया गया है कि चूंकि काउंसलिंग और सीट आवंटन 7 जनवरी से शुरू होने वाला है, इसलिए मौजूदा परिणामों को जारी रखने से योग्य उम्मीदवारों को गंभीर नुकसान होगा।
क्लैट 2026 का आयोजन
क्लैट 2026 का आयोजन 7 दिसंबर 2025 को हुआ था। इस परीक्षा के स्कोर के आधार पर देश की 25 राष्ट्रीय लॉ यूनिवर्सिटीज में यूजी और पीजी लॉ कोर्स में प्रवेश मिलता है।क्लैट 2026 के लिए 75,009 उम्मीदवारों ने यूजी कोर्स में और 17,335 ने पीजी कोर्स में पंजीकरण कराया था।
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