CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर विवाद: छात्रों की चिंताएँ और समर्थन

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। छात्रों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन उन्हें इस प्रणाली का सार्वजनिक समर्थन करने के लिए मजबूर कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कुछ छात्र और शिक्षक इस प्रणाली की तारीफ कर रहे हैं, जबकि अन्य छात्र इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और छात्रों की चिंताएँ क्या हैं।
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CBSE की OSM प्रणाली पर उठे सवाल

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रिजल्ट में विसंगतियों के आरोपों के बीच एक नया गंभीर मुद्दा सामने आया है। छात्रों का कहना है कि स्कूल प्रशासन उन्हें इस डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया का सार्वजनिक समर्थन करने के लिए मजबूर कर रहा है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit पर एक छात्र के पोस्ट और 'X' (ट्विटर) पर एक PM SHRI स्कूल द्वारा साझा किए गए वीडियो ने इस बहस को और बढ़ावा दिया है।


छात्रों के आरोप

एक छात्र ने पोस्ट में लिखा, "मेरे स्कूल के शिक्षक हमें Instagram पर यह बताने के लिए मजबूर कर रहे हैं कि 'मैं (नाम) हूँ, CBSE बोर्ड के तहत इस स्ट्रीम में मेरे इतने प्रतिशत अंक आए हैं, और मुझे OSM चेकिंग से कोई दिक्कत नहीं है।'" छात्र ने यह भी कहा कि परीक्षा पास करने के बाद भी वह मानसिक रूप से परेशान महसूस कर रहा है।


PM SHRI स्कूल का समर्थन

इसी समय, जयपुर के एक PM SHRI केंद्रीय विद्यालय ने 'X' पर दो वीडियो साझा किए, जिसमें एक छात्र और एक शिक्षक CBSE की OSM प्रणाली की प्रशंसा कर रहे हैं। एक छात्र, जिसने 96% अंक प्राप्त किए, ने कहा, "मेरे रिज़ल्ट के बाद मुझे लगा कि मार्किंग निष्पक्ष और पारदर्शी थी।"


उसने आगे कहा कि OSM चेकिंग प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सटीक होता है।


OSM प्रणाली के लाभ

छात्र ने वीडियो में कहा, "OSM का एक बड़ा फ़ायदा यह है कि चेकिंग की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और कम पक्षपातपूर्ण हो जाती है।" उसने यह भी बताया कि डिजिटल मूल्यांकन से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ता है।


एक PM SHRI हिंदी शिक्षिका ने भी OSM प्रणाली की तारीफ़ की और कहा कि इससे समय की बचत होती है।


OSM विवाद का सार

CBSE का ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम एक डिजिटल जाँच प्रक्रिया है, जिसमें स्कैन की गई आंसर शीट को ऑनलाइन अपलोड किया जाता है। यह प्रणाली तब सवालों के घेरे में आई जब कई छात्रों ने रिज़ल्ट के बाद कुछ दिक्कतों की शिकायत की।


छात्रों ने स्कैन किए गए पन्नों के धुंधले होने और आंसर शीट के कुछ पन्नों के गायब होने जैसी समस्याओं का आरोप लगाया।


भरोसे की चर्चा

आंसर शीट में आई गड़बड़ियों की शिकायतों ने पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी एक बड़ी चर्चा को जन्म दिया है। Reddit पोस्ट में किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है।


CBSE ने भी उन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। छात्रों के लिए चिंता सिर्फ नंबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या वे किसी सिस्टम पर सवाल उठा सकते हैं।