AI के प्रभाव पर पीएम मोदी और सैम ऑल्टमैन का समान दृष्टिकोण
AI और नौकरी संकट पर विचार
फरवरी में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण नौकरी संकट को लेकर दुनिया की चिंताओं को कम किया। उन्होंने कहा कि इतिहास यह दर्शाता है कि नवाचार के समय नए अवसर उत्पन्न होते हैं। पीएम ने यह भी बताया कि AI नई नौकरियों का सृजन करेगा। इसी विषय पर OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने भी हाल ही में अपनी राय साझा की।
सैम ऑल्टमैन ने सिडनी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि उन्हें पहले यह उम्मीद थी कि OpenAI के ChatGPT के लॉन्च के बाद कॉल सेंटर और ग्राहक सहायता की नौकरियों में भारी कमी आएगी। लेकिन उन्होंने यह भी कहा, "मुझे खुशी है कि मेरा अनुमान गलत था।" एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, OpenAI ने AI की तकनीकी प्रगति की गति का सही आकलन किया, लेकिन इसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को लेकर उनकी भविष्यवाणी गलत साबित हुई।
उन्होंने स्वीकार किया कि नौकरी खत्म होने की चिंताएं उस समय वास्तविक थीं। ऑल्टमैन की यह टिप्पणी तब आई है जब कई प्रमुख कंपनियों ने AI टूल्स का उपयोग बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया है। पीएम मोदी ने पहले ही यह स्पष्ट किया था कि AI नई नौकरियों का निर्माण करेगा।
पीएम मोदी का दृष्टिकोण
इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में पीएम मोदी ने कहा था कि AI एक 'फोर्स मल्टीप्लायर' है, जो संभावनाओं की सीमाओं को बढ़ाने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि AI का उपयोग करके डॉक्टर, वकील और शिक्षक पहले से कहीं अधिक लोगों तक पहुंच सकते हैं और उनकी सहायता कर सकते हैं।
सैम ऑल्टमैन ने यह भी बताया कि मानवीय संबंध और संवाद आज भी कई नौकरियों में महत्वपूर्ण हैं और मशीनें उन्हें पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकतीं। उन्होंने एक उदाहरण दिया कि उन्होंने कुछ समय के लिए AI से ईमेल के जवाब लिखवाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में खुद जवाब लिखना शुरू कर दिया।
