AAP में बगावत: राघव चड्ढा और सांसदों का पार्टी छोड़ना

आम आदमी पार्टी (AAP) में हालिया बगावत ने पार्टी की स्थिति को कमजोर कर दिया है। राघव चड्ढा और अन्य सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद, अटकलें लगाई जा रही हैं कि दिल्ली और पंजाब में और विधायक भी ऐसा कर सकते हैं। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं, तो विधायक भी ऐसा कर सकते हैं। दिल्ली में AAP के 22 विधायकों में से कई पार्टी से अलग होना चाहते हैं। क्या यह बगावत AAP के लिए और भी बड़े संकट का कारण बनेगी? जानिए पूरी कहानी।
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gyanhigyan

आम आदमी पार्टी की स्थिति में बदलाव

AAP में बगावत: राघव चड्ढा और सांसदों का पार्टी छोड़ना

दिल्ली की सत्ता से आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की पकड़ कमजोर होती जा रही है। हाल ही में राघव चड्ढा सहित कई सांसदों ने पार्टी को अलविदा कह दिया, जिससे संसद में AAP की स्थिति कमजोर हुई है। वीकेंड पर इस झटके के बाद, कांग्रेस और बीजेपी के सूत्रों का कहना है कि दिल्ली और पंजाब में AAP के लगभग 66 विधायक भी पार्टी छोड़ने का विचार कर सकते हैं।

क्या पंजाब के 50 और दिल्ली के 15 विधायक भी छोड़ेंगे AAP?
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने चेतावनी दी है कि यदि सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं, तो पंजाब में 50 विधायक भी ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब पार्टी बिना स्पष्ट दिशा-निर्देश के निर्णय लेती है, तो ऐसी स्थिति बन सकती है।

दिल्ली की स्थिति
दिल्ली विधानसभा में AAP के 22 विधायक हैं, और कई विधायक पार्टी से अलग होना चाहते हैं। उन्हें बीजेपी में शामिल होने के लिए कम से कम 16 विधायकों की आवश्यकता होगी। यदि राघव चड्ढा के करीबी लोग विधायकों को अपने पक्ष में लाने में सफल होते हैं, तो केजरीवाल की पार्टी को दिल्ली में भी बड़ा झटका लग सकता है।

पंजाब की स्थिति
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं, जिनमें AAP के 92 विधायक हैं। यहां बहुमत का आंकड़ा 59 है, जिससे AAP के पास सुपर मेजोरिटी है। इसलिए, पंजाब में इतनी बड़ी टूट असंभव लगती है। राजा वडिंग का बयान AAP पर एक तंज के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, राजनीति में कुछ भी संभव है। शिवसेना के उदाहरण से यह स्पष्ट है कि कैसे 35 से अधिक विधायकों के पाला बदलने से महाराष्ट्र की सरकार अल्पमत में आ गई थी। ऐसे में भविष्य में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है।

राघव चड्ढा और संदीप कुमार पाठक के पास चुनावी प्रबंधन के लिए आवश्यक जानकारी है। दिल्ली में AAP के कुछ नेता सक्रिय हैं, जबकि अन्य सुस्त दिखाई दे रहे हैं। सांसदों के पार्टी छोड़ने से AAP के अंदर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है, और अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी को एक और झटका लग सकता है।