63 साल पुरानी दवा की पर्ची ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम
सोशल मीडिया पर वायरल पर्ची
एक डॉक्टर द्वारा 63 साल पहले लिखी गई एक पर्ची इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। यह पर्ची एक महिला को उसके घर की सफाई के दौरान मिली। यह पर्ची 1962 में लिखी गई थी, जब उसके परिवार के किसी सदस्य को वायरल बुखार हुआ था। महिला ने जब उस पर्ची को देखा, तो वह चकित रह गई।
आजकल जब लोग डॉक्टर के पास जाते हैं, तो अक्सर छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी महंगी दवाइयां लिखी जाती हैं, जिनकी कीमत हजारों में होती है। इसके बावजूद, कई बार दवाइयों का असर नहीं होता। लेकिन 1962 में डॉक्टर घरेलू उपचारों पर अधिक भरोसा करते थे। महिला ने जब उस पर्ची पर लिखी दवा देखी, तो वह भी हैरान रह गई और उसकी तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर साझा कर दी।
पर्ची पर लिखी गई दवा
पर्ची पर साल 1962 का उल्लेख है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह पर्ची किस स्थान की है। वायरल बुखार के लिए लिखी गई दवाइयों को पढ़कर महिला को आश्चर्य हुआ। उस समय मरीज को सर्दी-खांसी थी, जो एक सामान्य बीमारी है। जबकि आजकल डॉक्टर महंगी दवाइयां लिखते हैं, उस समय डॉक्टर ने केवल तीन सरल चीजें लिखी थीं:
व्हिस्की – 1 चम्मच
नींबू का रस – 1 चम्मच
शहद – 1 चम्मच
इन तीनों को मिलाकर हर घंटे या आवश्यकता अनुसार लेने की सलाह दी गई थी।
सोशल मीडिया पर नुस्खा वायरल
महिला ने तुरंत पर्ची की तस्वीर खींचकर अपने परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की। इसके बाद यह पर्ची फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर फैल गई। 24 घंटे के भीतर इसे 50 लाख से अधिक लोग देख चुके थे। लोगों को यह नुस्खा बहुत पसंद आ रहा है और वे इस पर विभिन्न टिप्पणियाँ कर रहे हैं। कुछ लोग इसे असली देसी दवा मान रहे हैं, जबकि अन्य दवा कंपनियों की मार्केटिंग पर सवाल उठा रहे हैं। एक यूजर ने मजाक में कहा कि डॉक्टर ने मरीज को ठीक करने से पहले खुश कर दिया। यह नुस्खा आज भी कई देशों में लोकप्रिय है, जिसे 'हॉट टॉडी' कहा जाता है। ब्रिटेन, अमेरिका और स्कॉटलैंड में सर्दियों में लोग इसे पीते हैं। व्हिस्की गले की खराश को कम करती है, शहद खांसी में राहत देता है, और नींबू विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है। इन तीनों का संयोजन इम्यूनिटी को बढ़ाता है।
