62 वर्षीय महिला की जान बचाने में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ की महत्वपूर्ण भूमिका

62 वर्षीय भूर कौर की कहानी एक मेडिकल इमरजेंसी की है, जब उनका ब्लड शुगर अचानक 550 mg/dL तक पहुँच गया। परिवार ने तुरंत कदम उठाए और उन्हें संगरूर के कश्मीरी हार्ट केयर सेंटर में भर्ती कराया। 'मुख्यमंत्री सेहत योजना' ने इस संकट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे उनका इलाज तुरंत शुरू हुआ। जानें कैसे समय पर इलाज ने उनकी जिंदगी को बचाया और उन्हें मौत के मुँह से वापस लाया।
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एक जीवनदायिनी पल

चंडीगढ़: जीवन में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जब समय केवल धीमा नहीं होता, बल्कि मानो थम जाता है। 62 वर्षीय भूर कौर के जीवन में भी ऐसा ही एक क्षण आया, जब उन्होंने बिना किसी चेतावनी के एक गंभीर स्थिति का सामना किया। पिछले 15-16 वर्षों से वह डायबिटीज और हाइपरटेंशन से जूझ रही थीं, जो उनकी दिनचर्या का एक सामान्य हिस्सा बन चुकी थी.


अचानक आई गंभीरता

दवाइयाँ, जाँच और सावधानियाँ सब कुछ सामान्य था, लेकिन एक दिन अचानक उनका ब्लड शुगर 550 mg/dL तक पहुँच गया। कुछ ही क्षणों में वह बेहोश हो गईं। उनके परिवार के पास सोचने का समय नहीं था, केवल तुरंत कदम उठाने का समय था। उनकी बहू परमजीत ने कहा, 'हम बस दौड़ रहे थे और प्रार्थना कर रहे थे।' उनके बेटे हरपाल के लिए वह क्षण एक बुरे सपने जैसा था.


अस्पताल में गंभीर स्थिति

जब भूर कौर को संगरूर के कश्मीरी हार्ट केयर सेंटर लाया गया, तब उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी। क्लिनिकल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अंशुमन फुल ने बताया कि उन्हें डायबिटिक कीटोएसिडोसिस, गंभीर संक्रमण और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर के साथ लाया गया था. उनका ऑक्सीजन स्तर गिर रहा था और शरीर में गंभीर मेटाबॉलिक असंतुलन था.


आईसीयू में जीवन की लड़ाई

आईसीयू में हर सेकंड मायने रखता था। ऑक्सीजन सपोर्ट, आईवी इंसुलिन, एंटीबायोटिक्स और लगातार मॉनिटरिंग की जा रही थी। डॉ. फुल ने कहा, 'हमारा ध्यान केवल उनकी जान बचाने पर था।' परिवार बाहर बैठा था, उम्मीद और विश्वास के सहारे.


स्वास्थ्य में सुधार

तीसरे दिन भूर कौर की स्थिति में सुधार के संकेत दिखने लगे। उनका ऑक्सीजन स्तर बेहतर हुआ और अंततः उन्हें होश आ गया। डॉ. फुल ने कहा, 'यह राहत का पहला पल था।' वह मृत्यु के कगार से लौट रही थीं.


मुख्यमंत्री सेहत योजना का योगदान

इस मेडिकल इमरजेंसी में ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. फुल ने कहा, 'इस योजना ने सुनिश्चित किया कि इलाज में कोई देरी न हो।' गंभीर मामलों में यह तेजी जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बना सकती है.


भूर कौर की नई जिंदगी

अब भूर कौर धीरे-धीरे स्वस्थ हो रही हैं और उन्होंने कहा, 'मैं डॉक्टरों और सरकार की आभारी हूँ।' यह अनुभव उनके परिवार के लिए जीवनभर यादगार रहेगा.


जीवन की कहानी

भूर कौर की कहानी केवल एक मेडिकल इमरजेंसी की नहीं है, बल्कि यह उस नाज़ुक स्थिति की है जब बीमारी अचानक आती है। यह बताती है कि समय पर इलाज और सही सहायता मिलने पर क्या होता है. उनके लिए सेहत कार्ड केवल एक दस्तावेज़ नहीं था, बल्कि यह जीवन था.