2026 में ज्येष्ठ मास का विशेष महत्व: जानें अधिक मास कब होगा

इस वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास का आगाज़ 2 मई से हुआ है, जो पूरे 60 दिनों तक चलेगा। इस दौरान अधिक मास का संयोग भी है, जो इसे विशेष बनाता है। अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। जानें इस महीने का धार्मिक महत्व और मान्यताएँ, जो भक्ति और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ समय माना जाता है।
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ज्येष्ठ मास 2026 का आगाज़

आज 2 मई से ज्येष्ठ मास की शुरुआत हो चुकी है, जिसे हिंदू पंचांग में तीसरा महीना माना जाता है। इसे जेठ का महीना भी कहा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, 2026 का ज्येष्ठ मास विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पूरे दो महीने तक चलेगा।


ज्येष्ठ माह की अवधि

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ मास 2 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा। यह सामान्य 30 दिन का नहीं, बल्कि 60 दिनों का होगा। इसका कारण है अधिक मास का संयोग, जो इस महीने को विशेष बनाता है।


अधिक मास की तिथियाँ

2026 में अधिक मास 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। यही अतिरिक्त समय ज्येष्ठ मास को दो महीने लंबा बनाता है। यह धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण संयोग हर तीन साल में आता है।


अधिक मास का अर्थ

हिंदू पंचांग में अधिक मास एक अतिरिक्त महीना होता है, जो चंद्र और सौर वर्ष के बीच के अंतर को संतुलित करने के लिए जोड़ा जाता है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का।


पुरुषोत्तम मास का महत्व

अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस महीने में उनकी पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है।


धार्मिक महत्व और मान्यताएँ

अधिक मास की अवधि को भक्ति और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ समय माना जाता है। लोग इस दौरान व्रत रखते हैं, पूजापाठ करते हैं और दानपुण्य में भाग लेते हैं। मान्यता है कि इस समय किए गए धार्मिक कार्यों से जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।