साइबर क्राइम से सुरक्षा: जागरूकता और सावधानी की आवश्यकता
साइबर क्राइम की बढ़ती समस्या
जयपुर: वर्तमान में इंटरनेट के उपयोग में वृद्धि के साथ-साथ कंप्यूटर, लैपटॉप, टैबलेट और मोबाइल उपकरणों का उपयोग भी बढ़ा है, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी बनी हुई है। इसके परिणामस्वरूप, प्रतिदिन हजारों लोग साइबर अपराध का शिकार हो रहे हैं, जिससे करोड़ों रुपये की हानि हो रही है। साइबर अपराध से बचने के लिए सबसे पहले जागरूकता की आवश्यकता है। सरकारी विभागों, संस्थाओं और बैंकों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे लोगों को जागरूक करें ताकि वे ठगी का शिकार न हों।
केंद्र और राज्य सरकारों के साथ राष्ट्रीयकृत बैंकों के साइबर सलाहकार कर्मेन्द्र कोहली ने बताया कि इंटरनेट के विस्तार के कारण साइबर अपराध में तेजी आई है। उन्होंने सुझाव दिया कि उपयोगकर्ताओं को अपने उपकरणों में उच्च स्तर की सुरक्षा जैसे एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर स्थापित करना चाहिए। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को लुभावने ऑफ़र से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि कोई भी संस्था या व्यक्ति मुफ्त में लाखों रुपये नहीं देता। ऐसे प्रलोभनों को देखकर लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
कर्मेन्द्र कोहली, जो कि सिक्योरआईज़ के सीईओ और निदेशक हैं, ने कहा कि पिछले 16 वर्षों से साइबर सुरक्षा सेवा प्रदाता के रूप में, वे सरकार और गैर-सरकारी वित्तीय संस्थानों को साइबर सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस, सेना, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों को साइबर अपराध से बचने के लिए विभिन्न कार्यशालाओं में प्रशिक्षण दिया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की साइबर सुरक्षा में पिछले कुछ वर्षों में काफी सुधार हुआ है। सरकारों और बैंकों को साइबर अपराध पर नियंत्रण पाने के लिए सलाह दी जाती है और उन्हें यह भी बताया जाता है कि साइबर अपराध होने के बाद उसे कैसे ट्रैक किया जाए। पिछले 16 वर्षों में, उन्होंने 14,000 से अधिक साइबर सुरक्षा उपाय विकसित किए हैं।
कोहली ने अनचाहे एसएमएस लिंक और कॉल से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसी भी लिंक या ईमेल को न खोलें और कॉल पर किसी को ओटीपी साझा न करें। लखपति और करोड़पति बनाने वाले ऐप्स को नजरअंदाज करना ठगी से बचने का एक प्रभावी तरीका है।
