श्रीलंका के तट पर अमेरिकी पनडुब्बी का हमला: 80 ईरानी नाविकों की मौत

हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत पर किए गए हमले ने वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है। इस घटना में 80 ईरानी नाविकों की मौत हो गई है। श्रीलंकाई अधिकारियों ने इस हमले के बाद कई शव बरामद किए हैं। जानें इस घटना के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भयावह सैन्य कार्रवाई का परिणाम

हिंद महासागर का नीला जल अब इंसानी खून से लाल हो गया है। श्रीलंका के दक्षिणी तट पर एक गंभीर सैन्य कार्रवाई ने वैश्विक तनाव को बढ़ा दिया है। एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी नौसेना के एक युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला किया, जिससे वह जल में समा गया। इस हमले के बाद समुद्र में 80 ईरानी नाविकों के शव तैरते हुए पाए गए हैं।


श्रीलंकाई अधिकारियों की जानकारी

श्रीलंकाई अधिकारियों ने बुधवार को पुष्टि की कि उन्होंने अमेरिकी पनडुब्बी के हमले के बाद डूबे ईरानी जहाज से लगभग 80 शव बरामद किए हैं। पहले, श्रीलंकाई नौसेना ने 'आईरिस देना' नामक ईरानी जहाज से 32 नाविकों को बचाया था, जो लगभग 180 नाविकों को ले जा रहा था।


अमेरिकी रक्षा मंत्री का बयान

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से टॉरपीडो से किसी दुश्मन के जहाज को डुबोने की पहली घटना है। उन्होंने बताया कि ईरानी जहाज हाल ही में भारत के एक अंतरराष्ट्रीय नौसैन्य अभ्यास में शामिल हुआ था।


विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश ने इस हमले को 'बेतुका' और 'भड़काऊ' बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से समुद्र में दहशत फैल सकती है और वैश्विक समुद्री व्यापार प्रभावित हो सकता है।


श्रीलंकाई विदेश मंत्री का बयान

श्रीलंकाई विदेश मंत्री विजिता हेराथ ने संसद में कहा कि सुबह 5:08 बजे एक आपातकालीन संदेश प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि जहाज पर लगभग 180 लोग सवार थे, जिनमें से 30 को बचा लिया गया।


बचाव अभियान की जानकारी

श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त बचाव अभियान चलाया। हेराथ ने कहा कि श्रीलंका अंतरराष्ट्रीय समुद्री बचाव संधियों के तहत किसी भी संकटग्रस्त व्यक्ति की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध है।