राज्यसभा में राघव चड्ढा ने प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज पर उठाया सवाल

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज के मुद्दे को उठाते हुए टेलीकॉम कंपनियों की आलोचना की। उन्होंने इनकमिंग कॉल्स के ब्लॉक होने और 28 दिन के रिचार्ज प्लान पर चिंता जताई। चड्ढा ने सरकार से मांग की कि अंतिम रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल्स जारी रहनी चाहिए। उनका कहना था कि मोबाइल फोन अब एक जीवन रेखा बन चुका है और उपभोक्ताओं को निष्पक्षता और पारदर्शिता का अधिकार है।
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राज्यसभा में उठाया मुद्दा

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने प्रीपेड मोबाइल यूज़र्स के रिचार्ज से संबंधित मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि टेलीकॉम कंपनियां मनमानी कर रही हैं, जिसके चलते यूजर्स को साल में 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।


इनकमिंग कॉल्स पर सवाल

राज्यसभा में राघव चड्ढा ने प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज पर उठाया सवाल


नई दिल्ली: राघव चड्ढा ने संसद में मोबाइल रिचार्ज के मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने टेलीकॉम कंपनियों की आलोचना की, जो रिचार्ज खत्म होने पर इनकमिंग कॉल्स को ब्लॉक कर देती हैं। उन्होंने रेगुलेटर्स से उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उनका कहना था कि वैलिडिटी खत्म होने के बाद भी यूज़र्स को कॉल मिलनी चाहिए।


रिचार्ज प्लान की वैधता

सांसद ने कहा कि यदि कोई रिचार्ज प्लान समाप्त हो जाता है, तो आउटगोइंग कॉल्स का बंद होना समझ में आता है, लेकिन इनकमिंग कॉल्स क्यों बंद की जाती हैं? इससे लोगों को संपर्क करने में कठिनाई होती है और महत्वपूर्ण संदेश जैसे बैंक OTP भी नहीं मिल पाते।


सरकार से मांगे

राघव चड्ढा ने सरकार से मांग की कि अंतिम रिचार्ज के बाद कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल्स और SMS जारी रहना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि अंतिम रिचार्ज के बाद मोबाइल नंबर को तीन साल तक डीएक्टिवेट नहीं किया जाना चाहिए।


मंथली प्लान पर चिंता

उन्होंने 28 दिन के मंथली रिचार्ज प्लान का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि यदि किसी चीज़ को मंथली कहा जाता है, तो उसे 30-31 दिनों के कैलेंडर महीने के अनुसार होना चाहिए। 28 दिन के चक्र के कारण उपभोक्ताओं को साल में 13 बार रिचार्ज के लिए भुगतान करना पड़ता है।


टेलीकॉम ऑपरेटर्स से अपेक्षाएं

चड्ढा ने कहा कि टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपने रिचार्ज प्लान को असली कैलेंडर महीनों के साथ समन्वयित करना चाहिए। आज मोबाइल फोन केवल एक लग्ज़री नहीं, बल्कि एक जीवन रेखा बन चुका है। प्रीपेड रिचार्ज उपभोक्ता निष्पक्षता और पारदर्शिता के हकदार हैं।