महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष की एकजुटता से सरकार को झटका

महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्षी दलों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई, जिससे सरकार को बड़ा झटका लगा। लगभग 230 सांसदों ने इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया, जिससे यह पारित नहीं हो सका। कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ रणनीति बनाई और सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के पीछे की रणनीतियों और विपक्ष की तैयारी के बारे में।
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महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष का एकजुटता प्रदर्शन

महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष की एकजुटता से सरकार को झटका

नई दिल्ली: महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पर विपक्षी दलों ने अभूतपूर्व एकजुटता दिखाई, जिससे सरकार को एक बड़ा झटका लगा। लगभग 230 सांसदों ने इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया, जिसके परिणामस्वरूप यह पारित नहीं हो सका। लंबे समय बाद, विपक्षी इंडिया गठबंधन ने न केवल संख्या में बल दिखाया, बल्कि रणनीतिक तैयारी के माध्यम से सरकार के एजेंडे को भी रोकने में सफल रहा।

16 मार्च को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे गए पत्र के बाद कांग्रेस ने सक्रियता दिखाई। इस पत्र का उद्देश्य विपक्ष के साथ सहमति बनाना था, लेकिन कांग्रेस ने इसे राजनीतिक रणनीति के रूप में लेते हुए सरकार को घेरने की योजना बनाई।

खरगे ने सर्वदलीय बैठक बुलाई
सरकार ने महिला आरक्षण पर समर्थन मांगा, तो खरगे ने कहा कि इस मुद्दे पर चुनावों के बाद सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाए। खरगे ने सरकार से बैठक बुलाने की मांग की और विपक्षी दलों के साथ संवाद को तेज किया।

विशेष सत्र से एक दिन पहले उनके निवास पर आयोजित बैठक में कांग्रेस, वाम दल, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सहित लगभग 20 दलों के नेता शामिल हुए। इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि किसी भी स्थिति में विधेयक को पारित नहीं होने दिया जाएगा।

एकजुटता की रणनीति
विपक्ष ने अपने सांसदों की पूरी उपस्थिति सुनिश्चित करने पर जोर दिया। बैठक में तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के कारण कुछ सांसद अनुपस्थित रह सकते हैं।

राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि यदि संख्या पूरी नहीं हुई, तो इसका सीधा लाभ बीजेपी को होगा। इसके बाद शिवसेना नेता उद्धव ठाकरे ने आश्वासन दिया कि वे ममता बनर्जी से बात कर सभी सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे।

तमिलनाडु में चुनाव प्रचार में व्यस्त डीएमके प्रमुख एम. के. स्टालिन ने भी अपने सांसदों को एक दिन पहले ही दिल्ली भेज दिया। उमर अब्दुल्ला और कपिल सिब्बल जैसे नेताओं ने बैठक में चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक पारित हो गया, तो परिसीमन की प्रक्रिया विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से हानिकारक साबित हो सकती है।