भारत में बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की शुरुआत: यात्रा को बनाएगा तेज और आसान

भारत ने सड़क यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम की शुरुआत की है। यह नई तकनीक टोल प्लाजा पर लंबी कतारों को समाप्त करेगी और वाहनों को बिना रुके सामान्य गति से गुजरने की अनुमति देगी। चोरयासी टोल प्लाजा पर लागू इस प्रणाली से ट्रैफिक जाम की समस्या का समाधान होगा और ईंधन की बचत भी होगी। जानें इस तकनीक के कार्यप्रणाली और इसके भविष्य के प्रभावों के बारे में।
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भारत में टोल यात्रा को सरल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

भारत में सड़क यात्रा को और अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। अब टोल प्लाजा पर लंबी कतारों में खड़े होने और वाहनों के रुकने की समस्या समाप्त होने जा रही है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने गुजरात के सूरत में देश का पहला बैरियर-फ्री टोलिंग सिस्टम आधिकारिक रूप से लॉन्च किया है। यह नई तकनीक न केवल समय की बचत करेगी, बल्कि हाईवे पर ट्रैफिक जाम से भी राहत दिलाएगी।


मल्टीलेन फ्री फ्लो सिस्टम की विशेषताएँ

सूरत के निकट नेशनल हाईवे 48 पर स्थित चोरयासी टोल प्लाजा पर इस अत्याधुनिक मल्टीलेन फ्री फ्लो सिस्टम को लागू किया गया है। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सड़क पर कोई बैरियर नहीं होता। वाहन बिना रुके सामान्य गति से टोल प्लाजा से गुजर सकते हैं, और लगे हुए सेंसर और कैमरे अपने आप टोल शुल्क काट लेते हैं।


सफर होगा तेज़ और सुविधाजनक

पहले, फास्टैग होने के बावजूद वाहनों को बैरियर के सामने रुकना पड़ता था ताकि सेंसर टैग को स्कैन कर सकें। लेकिन चोरयासी टोल प्लाजा पर अब ऐसा नहीं होगा। यहां वाहन 80 से 100 किमी प्रति घंटे की गति से गुजर सकते हैं, और टोल अपने आप कट जाएगा। इस नए सिस्टम से पीक आवर्स के दौरान होने वाली भीड़ पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, बार-बार गाड़ी रोकने और स्टार्ट करने की आवश्यकता नहीं होने से ईंधन की भी बचत होगी।


इस तकनीक का कार्यप्रणाली

इस बैरियरलेस सिस्टम में सड़क के ऊपर लगे गैंट्री पर हाईटेक कैमरे और सेंसर स्थापित हैं। जैसे ही कोई वाहन इस गैंट्री के नीचे से गुजरता है, सेंसर गाड़ी के फास्टैग को स्कैन कर लेते हैं। यदि किसी वाहन पर फास्टैग नहीं है, तो हाईस्पीड कैमरे नंबर प्लेट को पढ़ लेते हैं और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक के माध्यम से मालिक के खाते से राशि काट दी जाती है या चालान जारी किया जाता है।


भारत के लिए एक नया मील का पत्थर

सूरत में शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट भारत के हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। NHAI की योजना है कि भविष्य में देश के अन्य व्यस्त हाईवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे मार्गों पर भी इस तकनीक को लागू किया जाए। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में पूरे देश से फिजिकल टोल बूथ हटा दिए जाएं और जीपीएस या बैरियरलेस तकनीक के माध्यम से टोल वसूला जाए।