भारत ने मध्य पूर्व तनाव पर इजराइल और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों से की चर्चा

भारत ने हाल ही में इजराइल और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों के साथ मध्य पूर्व में चल रहे तनाव पर महत्वपूर्ण चर्चा की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी और होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता पर विचार साझा किए। इस वार्ता के दौरान, इजराइली विदेश मंत्री ने ईरान के परमाणु हथियारों पर अमेरिका के मजबूत रुख की आवश्यकता पर जोर दिया। जानें इस बातचीत के प्रमुख बिंदु और इसके वैश्विक प्रभाव।
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भारत की नजर मध्य पूर्व के तनाव पर

भारत मध्य पूर्व में चल रहे तनाव पर लगातार ध्यान दे रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार से बातचीत की, जिसमें उन्होंने ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी और पश्चिम एशिया के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा, जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग के साथ भी टेलीफोन पर बात की, जिसमें ईरान और अमेरिका-इजराइल संघर्ष से उत्पन्न हालात पर चर्चा की गई।


जयशंकर और सार की बातचीत के मुख्य बिंदु

जयशंकर की कॉल के बाद, सार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले ईरान के कार्यों पर 'एक्शन' की आवश्यकता है। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर साझा किया, "आज दोपहर इजराइल के विदेश मंत्री सार के साथ टेलीकॉन हुआ, जिसमें हमने पश्चिम एशिया की स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।"


शांति वार्ता से पहले की बातचीत

यह बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के नए दौर की कोशिशों के बीच हुई, जो इस्लामाबाद में प्रारंभिक वार्ता के असफल होने के बाद हो रही है। इजराइली विदेश मंत्री ने कहा, "हमने ईरान, होर्मुज जलडमरूमध्य और लेबनान पर चर्चा की। मैंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका का मजबूत रुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए आवश्यक है।"


अमेरिकी नाकाबंदी से बढ़ी चिंताएं

ईरान ने भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का मार्ग कुछ हद तक खोला है, लेकिन अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी से भारत को ईरान से मिलने वाला मार्ग भी खतरे में पड़ गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने होर्मुज के बाहर नाकाबंदी लगाने का आदेश दिया है, जिससे ईरान की अनुमति से आने वाले जहाजों पर भी खतरा मंडराने लगा है। ईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आवागमन पर रोक लगाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतें बढ़ गई हैं, क्योंकि इस मार्ग से वैश्विक तेल और LNG का लगभग 20 प्रतिशत ट्रांजिशन होता है।