भारत निर्वाचन आयोग की पश्चिम बंगाल सरकार को चेतावनी: निर्देशों का पालन न करने पर समय सीमा निर्धारित

भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल सरकार को चुनाव संबंधी निर्देशों की अनदेखी पर कड़ी चेतावनी दी है। आयोग ने राज्य सरकार को 9 फरवरी 2026 तक निर्देशों का अनुपालन करने का समय दिया है। आयोग ने बताया कि कई महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन नहीं किया गया है, और इसके चलते राज्य प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जानें आयोग की नाराजगी के पीछे की वजहें और क्या हैं आगे की संभावनाएँ।
 | 
भारत निर्वाचन आयोग की पश्चिम बंगाल सरकार को चेतावनी: निर्देशों का पालन न करने पर समय सीमा निर्धारित

निर्वाचन आयोग की नाराजगी

भारत निर्वाचन आयोग (EC) ने पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चुनाव संबंधी निर्देशों की अनदेखी पर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। आयोग ने एक सख्त पत्र जारी करते हुए राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि कई महत्वपूर्ण निर्देशों का पालन नहीं किया गया है, जबकि उन्हें बार-बार याद दिलाया गया था। अब आयोग ने राज्य सरकार को इन निर्देशों के अनुपालन के लिए 9 फरवरी 2026 तक की अंतिम समय सीमा दी है।


निर्देशों का पालन न करने की जानकारी

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में आयोग ने कहा कि पहले जारी किए गए कई निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। आयोग ने यह भी बताया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ), दो सहायक ईआरओ (एईआरओ) और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।


निलंबन और अनुपालन की मांग

आयोग ने अपने पत्रों में 5 अगस्त 2025 और 2 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्रों का उल्लेख किया। आयोग ने कहा कि बशीरहाट-2 की एईआरओ और प्रखंड विकास अधिकारी सुमित्रा प्रतिम प्रधान को निलंबित नहीं किया गया है, जबकि उन पर वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए 11 अतिरिक्त एईआरओ की अनधिकृत तैनाती का आरोप है।


निर्वाचन आयोग की चिंताएँ

निर्वाचन आयोग ने 25 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्र के माध्यम से 48 घंटे के भीतर अनुपालन करने की मांग की थी। यह 21 सितंबर 2000 के उच्चतम न्यायालय के आदेश और 31 मई 2023 को जारी आयोग के निर्देशों का उल्लंघन है। इसके अलावा, आयोग ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में 27 अक्टूबर 2025 को जारी निर्देशों के उल्लंघन के बावजूद तीन मतदाता सूची पर्यवेक्षकों के तबादले अब तक रद्द नहीं किए गए हैं।


न्यायालय के आदेशों की अवहेलना

निर्वाचन आयोग ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि यह देरी न केवल आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है, बल्कि 21 सितंबर 2000 के उच्चतम न्यायालय के आदेश का भी उल्लंघन है। आयोग ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 25 जनवरी को दिए गए '48 घंटे के अल्टीमेटम' को राज्य प्रशासन ने गंभीरता से नहीं लिया।


नियुक्तियों के मानकों पर सवाल

आयोग ने निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और चुनाव अधिकारियों की नियुक्तियों पर भी आपत्ति जताई है। आयोग का कहना है कि ये नियुक्तियां उसके निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं।